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खंडवा के पुनासा वन क्षेत्र में पतझड़ जैसे हालात, इल्लियों ने सागौन के पेड़ों की पत्तियां चट कीं

 

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में भादो के महीने में वन क्षेत्र के भीतर पतझड़ जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। पुनासा वन क्षेत्र में खंडवा-भोपाल मार्ग पर मूंदी के पास करीब एक किलोमीटर के दायरे में सागौन के कई पेड़ सूखे नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि पेड़ों की पत्तियों पर बड़ी संख्या में इल्लियों का प्रकोप है, जो तेजी से पत्तियां खा रही हैं। इसके चलते हरे-भरे नजर आने वाले पेड़ों पर पत्तियां कम हो गई हैं और पूरा क्षेत्र पतझड़ जैसा दिखाई देने लगा है।

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मूंदी के पास सड़क के दोनों ओर सागौन के पेड़ों की पत्तियां अचानक गायब होने लगी हैं। कई पेड़ पूरी तरह पत्तियों से खाली दिखाई दे रहे हैं। सामान्य तौर पर इस समय वन क्षेत्र में पेड़ों पर हरियाली नजर आती है, लेकिन कीट प्रकोप के कारण यहां अलग ही स्थिति बनी हुई है।

तितली विशेषज्ञ धर्मेंद्र पारे के अनुसार, सागौन के पेड़ों पर इल्लियों का प्रकोप दिखाई दे रहा है। ये इल्लियां पेड़ों की कोमल और हरी पत्तियों को तेजी से खा रही हैं। बड़ी संख्या में इल्लियों के एक साथ सक्रिय होने के कारण कम समय में ही पेड़ों की पत्तियां खत्म हो जाती हैं। इसके चलते पेड़ दूर से सूखे हुए दिखाई देते हैं।

वन क्षेत्र में इस तरह का कीट प्रकोप सामने आने के बाद स्थानीय लोगों की नजर भी इस ओर गई है। सड़क से गुजरने वाले लोग पेड़ों की स्थिति देखकर इसे असामान्य मान रहे हैं। खास तौर पर भादो के महीने में पतझड़ जैसी स्थिति होने के कारण लोगों में इसे लेकर चर्चा है।

जानकारों के मुताबिक, पेड़ों की पत्तियां खत्म होने के बाद उनकी प्राकृतिक वृद्धि और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सागौन जैसे पेड़ प्रतिकूल परिस्थितियों में दोबारा नई पत्तियां निकालने की क्षमता रखते हैं। इसका असर कितना गंभीर होगा, यह कीट प्रकोप की अवधि और उसकी तीव्रता पर निर्भर करेगा।

फिलहाल पुनासा वन क्षेत्र में करीब एक किलोमीटर हिस्से में सागौन के पेड़ों की यह स्थिति देखी जा रही है। वन विभाग की ओर से मामले का निरीक्षण कर कीट प्रकोप की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते निगरानी और आवश्यक प्रबंधन उपाय किए जाएं तो पेड़ों को होने वाले नुकसान को नियंत्रित किया जा सकता है।