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जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में शामिल हुए असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित भारद्वाज बर्खास्त, नारे लगाने का वीडियो हुआ था वायरल

 

उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित एक डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित भारद्वाज को बर्खास्त कर दिया गया है। आरोप है कि वे 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे और वहां प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए थे। कॉलेज प्रबंधन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से हटा दिया।

जानकारी के अनुसार, मोहित भारद्वाज जंतर-मंतर पर आयोजित छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उनके कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें वह प्रदर्शनकारियों के साथ नारे लगाते नजर आ रहे थे। वीडियो में कथित तौर पर "मोदी तुम होश में आओ…" और "मोदी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है…" जैसे नारे सुनाई दे रहे थे।

वीडियो सामने आने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लिया। बताया जा रहा है कि संस्थान की ओर से मामले की जांच कराई गई और इसके बाद असिस्टेंट प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया। कॉलेज प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए मोहित भारद्वाज की सेवाएं समाप्त कर दीं।

यह मामला उस समय सामने आया, जब जंतर-मंतर पर छात्र विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान कई छात्र संगठनों और समर्थकों की मौजूदगी रही थी। इसी दौरान मोहित भारद्वाज के शामिल होने और नारे लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था।

कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि संस्थान के कर्मचारियों से कुछ आचार संहिता और अनुशासन संबंधी अपेक्षाएं होती हैं। इसी आधार पर कार्रवाई की गई है। हालांकि, इस मामले में प्रोफेसर की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

वहीं, इस कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत और सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोगों ने कॉलेज के फैसले का समर्थन किया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि किसी शिक्षक की व्यक्तिगत राजनीतिक अभिव्यक्ति को लेकर कार्रवाई करने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए।

फिलहाल मामला चर्चा में बना हुआ है और आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं। कॉलेज प्रशासन के फैसले के बाद यह मुद्दा एक बार फिर शिक्षकों की भूमिका, संस्थागत अनुशासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस का विषय बन गया है।