शाजापुर में निकला एशिया के सबसे बड़े दुलदुल का जुलूस, मोहर्रम पर दिखी परंपरा और आस्था
मोहर्रम की 8वीं तारीख पर शहर में ऐतिहासिक और पारंपरिक दुलदुल जुलूस निकाला गया। किला रोड पर हुए इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और देर तक धार्मिक माहौल बना रहा।
आकर्षण का केंद्र रहा दुलदुल जुलूस
जुलूस का मुख्य आकर्षण एशिया के सबसे बड़े दुलदुल में से एक माना जाने वाला प्रतीकात्मक घोड़ा रहा। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग किला रोड पर एकत्र हुए।
पारंपरिक दौड़ और धार्मिक आयोजन
जुलूस के दौरान पारंपरिक दौड़ और धार्मिक रस्में भी निभाई गईं। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन और शोहदाए कर्बला को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और नारे-ए-तकबीर के बीच माहौल को भावनात्मक बनाया।
सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम
प्रशासन की ओर से जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल पूरे मार्ग पर तैनात रहा और भीड़ को नियंत्रित किया गया।
भाईचारे और एकता का संदेश
आयोजकों ने बताया कि यह जुलूस केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक भी है। आयोजन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
मोहर्रम के इस पारंपरिक आयोजन ने शहर में धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।