मूंग खरीदी का दायरा 60% होते ही मंडी में घटी आवक, करोंद मंडी में एक दिन में 85% की गिरावट
किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार द्वारा मूंग खरीदी का दायरा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत किए जाने का असर अब कृषि मंडियों में साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी खरीद का दायरा बढ़ने के बाद किसानों का रुझान मंडियों की बजाय सरकारी खरीद केंद्रों की ओर बढ़ गया है। इसका सीधा असर भोपाल की करोंद कृषि उपज मंडी में देखने को मिला, जहां गुरुवार को मूंग की आवक में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई।
मंडी के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार को करोंद मंडी में 167 क्विंटल मूंग की आवक हुई थी, लेकिन गुरुवार को यह घटकर सिर्फ 25 क्विंटल रह गई। यानी महज एक दिन में मूंग की आवक में करीब 85 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इस अचानक आई गिरावट ने मंडी व्यापारियों और कृषि विभाग का ध्यान भी खींचा है।
सरकारी खरीद की ओर बढ़ा किसानों का रुझान
सरकार द्वारा मूंग खरीदी का दायरा बढ़ाने के फैसले के बाद किसानों को अब अधिक मात्रा में अपनी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर बेचने का अवसर मिल रहा है। इससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। यही वजह है कि कई किसान अब खुली मंडी में बिक्री करने के बजाय सरकारी खरीद केंद्रों का रुख कर रहे हैं।
आंदोलन के बाद लिया गया था फैसला
मूंग खरीदी को लेकर किसानों ने लंबे समय से सरकार से खरीदी का दायरा बढ़ाने की मांग की थी। आंदोलन और विरोध प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने किसानों को राहत देते हुए खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। सरकार का मानना है कि इस कदम से अधिक किसानों को एमएसपी का लाभ मिलेगा और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।
व्यापारियों की बढ़ी चिंता
मंडी में मूंग की आवक कम होने से व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी यही स्थिति बनी रही तो खुली मंडी में कारोबार प्रभावित हो सकता है। हालांकि किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्रों पर बेहतर मूल्य मिलने के कारण वे वहीं अपनी उपज बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
आने वाले दिनों में और बदल सकते हैं हालात
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया तेज होने के साथ मंडियों में मूंग की आवक और घट सकती है। वहीं, यदि खरीद केंद्रों पर प्रक्रिया सुचारु रही तो किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार की नई नीति का प्रदेश की अन्य कृषि मंडियों पर कितना असर पड़ता है और मूंग के बाजार भाव में आगे क्या बदलाव देखने को मिलता है।