इंदौर में एनालॉग पनीर का बड़ा कारोबार, 280 रुपए किलो तक कीमत; होटल-ढाबों से मोमोज स्टॉल तक खपत
मध्य प्रदेश में पनीर के नाम पर बिक रहे एनालॉग पनीर को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बीच इंदौर में इसके बड़े कारोबार का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में एनालॉग पनीर की सप्लाई होटल, ढाबों, रेस्टोरेंट के साथ-साथ मोमोज और चाइनीज फूड स्टॉल तक हो रही है।
सामान्य डेयरी पनीर की तुलना में सस्ता होने के कारण एनालॉग पनीर का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किए जाने की बात सामने आई है। इसकी कीमत करीब 280 रुपए प्रति किलो तक बताई जा रही है।
पालदा, बेटमा और महू में बड़ी यूनिट
जानकारी के मुताबिक इंदौर के पालदा, बेटमा और महू क्षेत्र में एनालॉग पनीर तैयार करने वाली बड़ी यूनिट संचालित होने की बात सामने आई है। इन स्थानों से तैयार उत्पाद को शहर के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किए जाने की जानकारी है।
एनालॉग पनीर को तैयार करने में दूध के बजाय या दूध के साथ वनस्पति वसा, पाउडर और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि इसकी लागत सामान्य पनीर की तुलना में कम पड़ती है।
होटल-ढाबों से स्ट्रीट फूड तक पहुंच
एनालॉग पनीर की खपत केवल बड़े होटल और ढाबों तक सीमित नहीं है। इसकी सप्लाई छोटे रेस्टोरेंट, फास्ट फूड सेंटर, मोमोज स्टॉल और चाइनीज फूड की दुकानों तक होने की बात सामने आई है।
कम कीमत के कारण कारोबारी इसे खरीदकर खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करते हैं। इससे लागत कम रहती है और ग्राहकों को भी अपेक्षाकृत सस्ता फूड उपलब्ध कराया जा सकता है।
पनीर के नाम पर बिक्री पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एनालॉग पनीर को वास्तविक डेयरी पनीर बताकर ग्राहकों को बेचा जा रहा है तो यह उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी का मामला हो सकता है। खाद्य उत्पादों की सही जानकारी और लेबलिंग के नियमों का पालन करना जरूरी है।
खाद्य सुरक्षा विभाग अब ऐसे उत्पादों के नमूने लेकर उनकी जांच कर सकता है। जांच के आधार पर यह पता चलेगा कि उत्पाद में किन चीजों का इस्तेमाल किया गया है और उसे किस नाम से बाजार में बेचा जा रहा था।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर
मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर पहले भी जांच और कार्रवाई के मामले सामने आए हैं। ऐसे में इंदौर में सामने आए कारोबार ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने चुनौती बढ़ा दी है।
प्रशासन की जांच में यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित यूनिट, सप्लायर और कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।