अमरकंटक नर्मदा उद्गम मंदिर में चढ़ावे पर सवाल, वीडियो में जाने सोने-चांदी का रिकॉर्ड गायब; दान प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ अमरकंटक स्थित मां नर्मदा के उद्गम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के जेवरात का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सोने-चांदी के चढ़ावे का रिकॉर्ड नहीं
जानकारी के मुताबिक, मुख्य उद्गम मंदिर में वर्षों से श्रद्धालु सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती वस्तुएं दान करते रहे हैं। लेकिन इन बहुमूल्य चढ़ावों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का दावा किया जा रहा है। इस खुलासे के बाद दान की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
ट्रस्ट और पुलिस के दावों में विरोधाभास
श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर में चढ़ावे के रूप में मिले सोने-चांदी के जेवर अमरकंटक थाने में जमा कराए जाते हैं और इसकी रसीदें ट्रस्ट के पास सुरक्षित हैं।हालांकि, दूसरी ओर अमरकंटक थाना प्रभारी (टीआई) ने इस दावे से इनकार करते हुए कहा कि थाने में मंदिर का कोई सोना-चांदी या चढ़ावा जमा नहीं कराया जाता। ट्रस्ट और पुलिस के अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।
बायलॉज नहीं, नियमों पर भी सवाल
नर्मदा उद्गम मंदिर का संचालन स्थानीय नगर परिषद के माध्यम से किया जाता है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि परिषद के पास मंदिर ट्रस्ट के बायलॉज (नियमावली) ही उपलब्ध नहीं हैं।इस कारण दानपेटियों की राशि की गिनती, सोने-चांदी के संरक्षण, लेखा-जोखा और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए कोई स्पष्ट और लिखित नियम सामने नहीं हैं। इससे वित्तीय पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
2001 में हुआ था ट्रस्ट का गठन
श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन वर्ष 2001 में किया गया था। ट्रस्ट को मंदिर के संचालन, विकास कार्यों, दानपेटियों की राशि के प्रबंधन और श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी सहित अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।हालांकि, हालिया खुलासों के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
जांच की मांग तेज
मामला सामने आने के बाद मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। श्रद्धालु और स्थानीय लोग चाहते हैं कि सोने-चांदी के चढ़ावे, दानपेटियों की आय और ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट कराया जाए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। धार्मिक आस्था के इस महत्वपूर्ण केंद्र में दान प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस मामले में होने वाली संभावित जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।