रायसेन में आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े का आरोप, सामान्य मरीजों को भर्ती दिखाकर क्लेम लेने की शिकायत; ग्रामीणों ने अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को कथित तौर पर फर्जी तरीके से अस्पताल में भर्ती दिखाकर सरकारी क्लेम लेने का मामला सामने आया है। मंडीदीप स्थित सार्थक मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल की ओर से गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाए गए और सामान्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को इलाज के नाम पर अस्पताल ले जाकर भर्ती किया गया।
आरोप है कि मरीजों को उनकी वास्तविक बीमारी के मुकाबले अलग बीमारी या उपचार के आधार पर अस्पताल में भर्ती दिखाया गया। इसके बाद आयुष्मान योजना के तहत उपचार का क्लेम प्रस्तुत कर राशि प्राप्त करने की कोशिश की गई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है और पूरे प्रकरण की जांच की मांग की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांवों में आयोजित स्वास्थ्य शिविरों में लोगों की जांच की गई। सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान मरीजों को बेहतर इलाज का भरोसा देकर अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद कुछ मरीजों को भर्ती कर लिया गया, जबकि उन्हें गंभीर बीमारी के चलते भर्ती होने की जरूरत नहीं थी।
मरीजों और उनके परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज की जानकारी दी गई थी। इसी भरोसे के कारण उन्होंने अस्पताल की प्रक्रिया पर ज्यादा सवाल नहीं उठाए। बाद में उन्हें पता चला कि उनके नाम पर अस्पताल में भर्ती और उपचार से संबंधित दावे किए गए हैं।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आयुष्मान योजना के तहत होने वाले क्लेम की जांच और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी योजना के साथ धोखाधड़ी का गंभीर मामला हो सकता है।
मामले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल में कितने मरीजों को इस तरह भर्ती दिखाया गया और उनके नाम पर कितने रुपये के क्लेम किए गए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों के रिकॉर्ड, अस्पताल की भर्ती प्रक्रिया, उपचार से संबंधित दस्तावेज और आयुष्मान योजना के तहत किए गए क्लेम की जांच की जा सकती है।
आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में योजना के नाम पर फर्जी भर्ती या गलत तरीके से क्लेम लेने के आरोप सामने आना गंभीर विषय है।
फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अस्पताल और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।