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जसनगर महोत्सव में अखंड हरि कीर्तन, 88 सालों से चली आ रही धार्मिक परंपरा में उमड़े श्रद्धालु

 

जसनगर महोत्सव के अवसर पर आयोजित अखंड हरि कीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़े इस आयोजन में भक्तों ने भगवान के जयकारे लगाए और भक्ति भाव के साथ कीर्तन में हिस्सा लिया। यह अखंड हरि कीर्तन पिछले 88 वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, जिसे क्षेत्र के लोग आज भी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहे हैं।

महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तिमय माहौल में नजर आया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन करते हुए भगवान का स्मरण किया। दिनभर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन चलता रहा, जिसमें स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया।

88 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन

आयोजकों ने बताया कि जसनगर में अखंड हरि कीर्तन की परंपरा कई दशकों पुरानी है। करीब 88 वर्षों से लगातार इस धार्मिक आयोजन का आयोजन किया जा रहा है। पीढ़ी दर पीढ़ी लोग इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

श्रद्धालुओं का मानना है कि अखंड हरि कीर्तन से क्षेत्र में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग आयोजन में शामिल होते हैं।

भक्ति में डूबे श्रद्धालु

कीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों में लीन नजर आए। भक्तों ने भगवान के जयकारे लगाए और पूरे वातावरण को धार्मिक रंग में रंग दिया। महिलाओं और पुरुषों ने अलग-अलग समूहों में भजन प्रस्तुत किए।

मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं, ताकि सभी लोग आराम से धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल हो सकें।

धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर

आयोजकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम करते हैं। अखंड हरि कीर्तन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों में आपसी भाईचारा और एकता बढ़ाने का माध्यम भी है।

जसनगर महोत्सव में आयोजित अखंड हरि कीर्तन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। 88 वर्षों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा ने एक बार फिर लोगों को भक्ति और आस्था के साथ जोड़ने का कार्य किया।