कूनो और गांधी सागर के बाद MP में चीतों को मिला तीसरा आशियाना, CM यादव ने 'व्योम' और 'नीरा' को छोड़ा
मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण परियोजना का दायरा अब और बढ़ गया है। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व यानी नौरादेही में भी चीतों की बसाहट शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को सागर जिले में कूनो से लाए गए दो चीतों को नए आवास में छोड़ा। इसके साथ ही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा आशियाना बन गया है।
मुख्यमंत्री ने जिन दो चीतों को छोड़ा, उनमें एक नर और एक मादा चीता है। कूनो से लाए गए नर चीते थोलो का नाम बदलकर ‘व्योम’ और मादा चीता CCB-3 का नाम ‘नीरा’ रखा गया है। दोनों को फिलहाल क्वारंटाइन बाड़े में छोड़ा गया है। अधिकारियों के मुताबिक करीब 15 दिन तक इनकी निगरानी की जाएगी। इसके बाद परिस्थितियां अनुकूल रहने पर इन्हें बड़े बाड़े में शिफ्ट किया जाएगा।
करीब 114 साल बाद बुंदेलखंड में चीतों की वापसी
व्योम और नीरा की रिहाई के साथ बुंदेलखंड क्षेत्र में लंबे समय बाद चीते लौटे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 114 साल बाद सागर क्षेत्र के जंगलों में चीतों की मौजूदगी हुई है। इससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना परियोजना लगातार आगे बढ़ रही है। कूनो में शुरू हुई यह पहल अब राज्य के दूसरे और तीसरे वन क्षेत्र तक पहुंच चुकी है। नौरादेही में चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड के वन क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।
अगले महीने दो और चीते लाने की तैयारी
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में फिलहाल दो चीतों को लाया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगले महीने यहां दो और चीते लाए जाएंगे। इसके बाद रिजर्व में चीतों की संख्या चार हो जाएगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि अनुकूल वातावरण मिलने पर यहां चीतों की संख्या आगे भी बढ़ सकती है।
बाघ और चीते एक ही रिजर्व में
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व की एक खासियत यह भी है कि यहां बाघ और चीते दोनों के संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है। यह रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है और करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। इसे 2023 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था।
रिजर्व की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इसे चीता परियोजना के तीसरे आवास के रूप में विकसित करने की अनुमति 2025 में दी गई थी। यहां प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता और बड़े वन क्षेत्र को चीतों के लिए अनुकूल माना गया।
पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद
चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंच सकता है। मध्य प्रदेश सरकार की योजना वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की भी है।
कूनो और गांधी सागर के बाद अब वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के जुड़ने से मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण का नेटवर्क और विस्तृत हो गया है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि व्योम और नीरा नए वातावरण में किस तरह ढलते हैं और यहां चीतों का कुनबा आगे कैसे बढ़ता है।