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जहरीली शराब से मौतों के बाद मध्यप्रदेश सरकार सख्त, इथेनॉल से लेकर मेथनॉल तक की होगी निगरानी; केमिकल के अवैध इस्तेमाल पर लगेगी रोक

 

मध्यप्रदेश के सागर और देवास में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद राज्य सरकार ने औद्योगिक केमिकल के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। अब उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले ऐसे केमिकल के निर्माण, भंडारण और परिवहन पर निगरानी बढ़ाई जाएगी, जिनका इस्तेमाल अवैध शराब बनाने या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य औद्योगिक उपयोग के लिए बनाए जाने वाले केमिकल को अवैध कारोबार तक पहुंचने से रोकना है।

इस व्यवस्था के तहत इथेनॉल, डी-नेचर्ड स्प्रिट, मेथनॉल और उसके बाय-प्रोडक्ट सहित कई रासायनिक पदार्थों की आवाजाही पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा थिनर, यूरिया और नौसादर जैसे पदार्थों के निर्माण और वितरण की भी निगरानी की जाएगी। सरकार की इस पहल को जहरीली शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन केमिकल की होगी विशेष निगरानी

सरकार की योजना के तहत औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में आने वाले कई केमिकल को निगरानी के दायरे में रखा जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से इथेनॉल, डी-नेचर्ड स्प्रिट, मेथनॉल, मेथनॉल के बाय-प्रोडक्ट, थिनर, यूरिया और नौसादर शामिल हैं।

इन पदार्थों का इस्तेमाल अलग-अलग उद्योगों और व्यावसायिक गतिविधियों में होता है। हालांकि, कुछ रसायनों का गलत इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। विशेष रूप से मेथनॉल युक्त जहरीले पदार्थों के सेवन से गंभीर विषाक्तता, अंधापन और मौत तक हो सकती है।

ऐसे में सरकार इन रसायनों की सप्लाई चेन पर निगरानी रखने की व्यवस्था मजबूत करना चाहती है, ताकि औद्योगिक उपयोग के नाम पर इनकी अवैध खरीद-बिक्री और परिवहन नहीं हो सके।

निर्माण से लेकर परिवहन तक रखी जाएगी नजर

नई व्यवस्था के तहत केवल केमिकल की बिक्री ही नहीं, बल्कि उनके निर्माण, भंडारण और परिवहन की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जाएगी। संबंधित एजेंसियां यह सुनिश्चित करने पर ध्यान देंगी कि केमिकल का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए हो, जिसके लिए उसे खरीदा और बेचा गया है।

इसके लिए केमिकल की आपूर्ति करने वाली इकाइयों, गोदामों और परिवहन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। संदिग्ध गतिविधियां सामने आने पर संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर सकेंगी।

संदिग्ध ढाबों और ठिकानों पर भी नजर

सरकार की रणनीति में केवल औद्योगिक इकाइयां ही नहीं, बल्कि ऐसे संदिग्ध स्थान भी शामिल हैं, जहां से केमिकल का अवैध परिवहन या दुरुपयोग होने की आशंका है। संदिग्ध ढाबों और अन्य ठिकानों पर निगरानी रखी जाएगी।

जांच एजेंसियां ऐसे स्थानों पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखेंगी, जहां अवैध रूप से केमिकल की खरीद-बिक्री या भंडारण की संभावना बनती है। इसका मकसद अवैध शराब के निर्माण और वितरण से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचना है।

जहरीली शराब की घटनाओं के बाद बढ़ी सख्ती

सागर और देवास में जहरीली शराब से हुई मौतों ने औद्योगिक केमिकल के दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है। जहरीले रसायनों से बनी शराब का सेवन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसे में सरकार अब केमिकल की पूरी सप्लाई चेन पर नियंत्रण मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है।

नई निगरानी व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो औद्योगिक केमिकल के अवैध इस्तेमाल और जहरीली शराब के कारोबार पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सरकार का फोकस निर्माण, भंडारण, परिवहन और संदिग्ध ठिकानों की निगरानी को मजबूत करने पर