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29 सितंबर के आदेश के बाद भी सूची दबाए रखने का आरोप, मंदसौर में पटवारियों की पोस्टिंग को लेकर ‘सिंडिकेट’ पर सवाल

 

जिले में पटवारियों की पोस्टिंग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 29 सितंबर को आदेश जारी होने के बावजूद पोस्टिंग की सूची सार्वजनिक नहीं की जा रही है। इसी बीच पसंदीदा जगह पर पोस्टिंग दिलाने के नाम पर 60 से 70 हजार रुपए तक की रकम मांगे जाने की चर्चा ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

आदेश के बाद भी सूची सार्वजनिक नहीं होने पर सवाल

बताया जा रहा है कि पटवारियों की पोस्टिंग को लेकर 29 सितंबर को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद संबंधित सूची सामने आने की उम्मीद थी, लेकिन आरोप है कि सूची को दबाकर रखा गया है। इसी वजह से पोस्टिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ लोगों का एक कथित ‘सिंडिकेट’ पसंदीदा स्थान पर पोस्टिंग दिलाने के लिए सक्रिय है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

60-70 हजार रुपए में पसंदीदा जगह का ऑफर?

चर्चा यह भी है कि पटवारियों को उनकी पसंद की जगह पर पोस्टिंग दिलाने के लिए 60 से 70 हजार रुपए तक का ऑफर दिया जा रहा है। आरोपों के मुताबिक, पसंदीदा हल्का या क्षेत्र दिलाने के नाम पर रकम की मांग की जा रही है।

अगर ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। सरकारी कर्मचारियों की पोस्टिंग जैसी प्रक्रिया में किसी भी तरह के लेन-देन की शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जाती है।

सूची सामने आने का इंतजार

पटवारियों की पोस्टिंग को लेकर संबंधित कर्मचारियों के बीच भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई कर्मचारी यह जानना चाहते हैं कि आखिर उन्हें किस क्षेत्र में जिम्मेदारी दी जाएगी। ऐसे में सूची को सार्वजनिक नहीं किए जाने से चर्चाओं और आरोपों को और हवा मिल रही है।

मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर क्या जानकारी दी जाती है, इस पर भी नजर बनी हुई है। यदि पोस्टिंग प्रक्रिया से संबंधित सूची और आदेश सार्वजनिक किए जाते हैं तो स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है।

जांच से साफ हो सकती है स्थिति

पोस्टिंग में पैसे के लेन-देन के आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की ओर से इस संबंध में शिकायत की जाती है तो पूरे मामले की जांच दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा सकती है।

फिलहाल मुख्य सवाल यही है कि 29 सितंबर के आदेश के बाद पोस्टिंग सूची सार्वजनिक क्यों नहीं हुई और पसंदीदा स्थान दिलाने के नाम पर रकम मांगने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। प्रशासन की ओर से जांच या स्पष्टीकरण सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।