ग्वालियर की रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.58 करोड़ की ठगी, डिजिटल अरेस्ट गैंग का खुलासा, महाराष्ट्र के कारोबारी से जुड़े कई राज सामने आए
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 69 वर्षीय रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन से 1.58 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र के लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे से पूछताछ के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर पूरे साइबर गिरोह की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस के आईपीएस अधिकारी और सीबीआई अधिकारी बताकर बुजुर्ग महिला को डराया-धमकाया। उन्हें कथित कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाकर 33 दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी स्थिति में रखा गया। इस दौरान महिला को लगातार वीडियो कॉल और फोन पर निगरानी में रखा गया तथा किसी से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी गई।
ठगों ने जांच और केस से बचाने का झांसा देकर महिला से अलग-अलग चरणों में कुल 1.58 करोड़ रुपए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करा लिए। जब पीड़िता को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
जांच के दौरान पुलिस ने महाराष्ट्र के लोहा कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसके माध्यम से साइबर फ्रॉड नेटवर्क के संचालन, बैंक खातों के इस्तेमाल और रकम के लेनदेन से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं तथा ठगी की रकम किन-किन खातों में भेजी गई।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। इसी कारण पुलिस अन्य राज्यों की एजेंसियों के साथ भी समन्वय कर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक दबाव में लेते हैं। इसके बाद कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे बड़ी रकम ऐंठ ली जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करने या गोपनीयता बनाए रखने का दबाव बनाए, तो उस पर भरोसा न करें। ऐसे मामलों की तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस साइबर ठगी गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों तक भी पहुंचने की उम्मीद है।