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एक नाली ने गांव को दो पंचायत, दो तहसील और दो विधानसभा में बांटा, रायसेन के करहोला में ग्रामीण परेशान

 

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले का करहोला गांव अपनी एक अनोखी भौगोलिक स्थिति के कारण चर्चा में है। यहां गांव के बीच से गुजरने वाली एक छोटी सी नाली ने पूरे गांव को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है। हैरानी की बात यह है कि इस नाली के एक तरफ गांव का हिस्सा एक ग्राम पंचायत और तहसील में आता है, जबकि दूसरी तरफ का हिस्सा दूसरी ग्राम पंचायत और तहसील के अंतर्गत है। इतना ही नहीं, गांव के दोनों हिस्से अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में भी आते हैं।

इस प्रशासनिक बंटवारे के कारण करहोला के ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक ही गांव में रहने के बावजूद लोगों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों और विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

नाली के इस पार अलग पंचायत, उस पार दूसरी

करहोला गांव की स्थिति ऐसी है कि एक छोटी सी नाली प्रशासनिक सीमा का काम करती है। नाली के एक तरफ रहने वाले ग्रामीणों के लिए अलग ग्राम पंचायत और तहसील निर्धारित है, जबकि दूसरी तरफ रहने वाले लोग दूसरी पंचायत और तहसील के अंतर्गत आते हैं।

गांव के लोगों के लिए यह व्यवस्था कई बार परेशानी का कारण बन जाती है। किसी सरकारी काम, दस्तावेज, प्रमाण पत्र या स्थानीय प्रशासन से जुड़ी समस्या के लिए लोगों को यह पहले पता करना पड़ता है कि उनका हिस्सा किस पंचायत और तहसील के अंतर्गत आता है।

विधानसभा क्षेत्र भी अलग-अलग

करहोला की स्थिति सिर्फ पंचायत और तहसील तक सीमित नहीं है। गांव का बंटवारा दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में भी है। यानी एक ही गांव के लोग अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों के मतदाता हैं।

इसका असर स्थानीय विकास कार्यों पर भी पड़ने की बात ग्रामीण बताते हैं। गांव की समस्याओं को लेकर किस जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकारी से संपर्क किया जाए, इसे लेकर कई बार असमंजस की स्थिति बन जाती है।

ग्रामीणों को विकास कार्यों में भी परेशानी

ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक सीमाओं के कारण गांव की कई सामान्य समस्याओं का समाधान भी आसान नहीं है। सड़क, नाली, पानी, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों में अलग-अलग विभागों और पंचायतों से संपर्क करना पड़ता है।

ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए और गांव की प्रशासनिक सीमाओं को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि एक ही गांव के लोगों को अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों में बांटने से सुविधाएं मिलने की प्रक्रिया जटिल हो गई है।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन पर है कि इस अनोखी स्थिति को लेकर कोई समाधान निकाला जाता है या करहोला इसी तरह दो पंचायत, दो तहसील और दो विधानसभा क्षेत्रों के बीच बंटा रहता है।