10 में से 6-7 युवा बोले- ‘याद नहीं रहा’: वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे पर विशेषज्ञों की चेतावनी, AI पर बढ़ती निर्भरता से घट सकता है खुद पर भरोसा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने पढ़ाई, कामकाज और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है। युवा अब जानकारी जुटाने, सवालों के जवाब पाने, नोट्स बनाने और मुश्किल विषय समझने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के बीच याददाश्त, खुद से सोचने की क्षमता और अपने फैसलों पर भरोसे को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने इस बात पर ध्यान देने की जरूरत बताई कि तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है। यदि हर छोटे-बड़े सवाल का जवाब तुरंत AI से लेने की आदत बन जाए, तो कुछ लोगों में खुद से याद करने, समस्या सुलझाने और निर्णय लेने का अभ्यास कम हो सकता है।
10 में से 6-7 युवाओं का ‘याद नहीं रहा’ कहना क्या बताता है?
युवाओं के बीच किए गए एक सर्वे या बातचीत में 10 में से 6-7 युवाओं के ‘याद नहीं रहा’ कहने का दावा सामने आया है। हालांकि, इस आंकड़े से जुड़े सर्वे का नाम, नमूने का आकार, उम्र का दायरा और शोध पद्धति की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे सभी युवाओं की याददाश्त का प्रतिनिधि आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
फिर भी, यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या युवा जानकारी को समझकर याद रख रहे हैं या केवल जरूरत पड़ने पर उसे AI से दोबारा हासिल कर रहे हैं। जानकारी तक तुरंत पहुंच और उसे अपने दिमाग में याद रखने की क्षमता अलग-अलग चीजें हैं।
AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता का क्या असर हो सकता है?
मनोविज्ञान में किसी काम को बार-बार बाहरी साधनों पर छोड़ने से उस काम का स्वयं अभ्यास कम होने की संभावना पर चर्चा होती रही है। उदाहरण के लिए, यदि कोई विद्यार्थी हर सवाल का हल बिना खुद कोशिश किए AI से प्राप्त करता है, तो उसे समस्या सुलझाने का पर्याप्त अभ्यास नहीं मिल पाता।
हालांकि, AI का इस्तेमाल अपने आप याददाश्त कमजोर होने या मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने का प्रमाण नहीं है। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि व्यक्ति तकनीक का उपयोग सीखने के लिए करता है या अपनी सोच और मेहनत से पूरी तरह बचने के लिए।
खुद पर भरोसा घटने का खतरा
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, अपने निर्णयों पर भरोसा अनुभव और अभ्यास से विकसित होता है। यदि व्यक्ति हर फैसले से पहले AI से पुष्टि लेने लगे, तो उसे अपने ज्ञान और निर्णय क्षमता पर संदेह होने लग सकता है। यह संभावना खासकर तब बढ़ सकती है, जब व्यक्ति बिना जांचे AI के जवाब को सही मान ले।
दूसरी ओर, AI का सही इस्तेमाल सीखने में मदद कर सकता है। यह कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने, अभ्यास के सवाल तैयार करने और किसी विचार के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा करने में उपयोगी हो सकता है।
AI का इस्तेमाल करें, लेकिन सोचने की आदत बनाए रखें
तकनीक और मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ आदतें अपनाई जा सकती हैं।
पहली, किसी सवाल का जवाब तुरंत AI से लेने के बजाय पहले खुद सोचने की कोशिश करें। दूसरी, जवाब मिलने के बाद उसे अपनी भाषा में समझाने या लिखने का अभ्यास करें। तीसरी, महत्वपूर्ण तथ्यों को विश्वसनीय स्रोतों से जांचें। चौथी, पढ़ाई और काम के दौरान कुछ समय बिना डिजिटल सहायता के समस्या सुलझाने के लिए रखें।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी दें ध्यान
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरत के समय सहायता लेने को प्रोत्साहित करना है। तकनीक का इस्तेमाल यदि तनाव, बेचैनी या अपने फैसलों को लेकर लगातार असमंजस पैदा कर रहा हो, तो अपनी डिजिटल आदतों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
AI एक सहायक साधन है, इंसानी सोच का विकल्प नहीं। इसका उद्देश्य व्यक्ति की समझ और क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि हर काम के लिए उस पर निर्भरता पैदा करना।