कूनो से बन्नी घास मैदान जाएंगे 6 चीते, सरदार पटेल जयंती पर शिफ्टिंग की तैयारी अंतिम चरण में
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से गुजरात के बन्नी घास मैदान में छह चीतों को भेजने की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। वन विभाग के स्तर पर कूनो और बन्नी, दोनों जगह आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। योजना के तहत चीतों को गुजरात के बन्नी घास मैदान में स्थानांतरित किया जाना है। संभावना जताई जा रही है कि 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर इन चीतों को बन्नी में छोड़ा जा सकता है।
चीतों के स्थानांतरण को लेकर वन विभाग की ओर से लंबे समय से तैयारियां की जा रही हैं। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की निगरानी, स्वास्थ्य परीक्षण और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था पहले से मौजूद है। अब चयनित चीतों को गुजरात भेजने से पहले उनकी सेहत और यात्रा के लिए उपयुक्तता का आकलन किया जा रहा है।
गुजरात का बन्नी घास मैदान चीतों के लिए नए आवास के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां चीतों के अनुकूल वातावरण तैयार करने के साथ उनके भोजन, सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी काम किया गया है। वन विभाग की टीम यह सुनिश्चित करने में जुटी है कि चीतों को नए स्थान पर पहुंचने के बाद किसी तरह की परेशानी न हो।
कूनो से छह चीतों को गुजरात भेजने की योजना चीता संरक्षण कार्यक्रम के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वर्ष 2022 में नामीबिया से चीतों को भारत लाए जाने के बाद मध्य प्रदेश का कूनो नेशनल पार्क देश में चीता पुनर्स्थापना कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को भारत लाया गया था।
अब चीतों की संख्या और उनके लिए उपलब्ध आवास को देखते हुए दूसरे स्थानों पर भी इनके पुनर्वास की योजना बनाई जा रही है। बन्नी घास मैदान को इसी उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। गुजरात में चीतों के लिए नया आवास विकसित होने से संरक्षण कार्यक्रम का दायरा बढ़ सकता है।
हालांकि, चीतों को कूनो से बन्नी भेजने की अंतिम तारीख और उन्हें छोड़े जाने का कार्यक्रम आधिकारिक स्तर पर अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर चीतों को बन्नी में छोड़े जाने की संभावना बताई जा रही है। वन विभाग की तैयारियां पूरी होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।