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इंदौर में पुलिस हेड कॉन्स्टेबल की 51 संपत्तियां मिलीं, बाजार कीमत 68 करोड़ रुपये से ज्यादा

 

मध्य प्रदेश के इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान की आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त जांच के दौरान लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसी को अब तक फिरोज खान और उससे जुड़े लोगों के नाम पर 51 अचल संपत्तियों की जानकारी मिली है। इनकी अनुमानित मौजूदा बाजार कीमत 68 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। मामले में संपत्तियों के दस्तावेज, खरीद के स्रोत और वित्तीय लेन-देन की जांच जारी है।

देवास में मिली 2.30 करोड़ रुपये की कृषि भूमि

लोकायुक्त की जांच में हाल ही में देवास जिले के राजोदा गांव में 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि का पता चला है। दस्तावेजों के अनुसार, यह जमीन 11 जून 2024 को रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह के नाम पर खरीदी गई थी। इसकी रजिस्ट्री में कीमत करीब 1.65 करोड़ रुपये दर्ज है, जबकि मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 2.30 करोड़ रुपये आंका गया है।इस नई जानकारी के सामने आने के बाद जांच में चिह्नित अचल संपत्तियों की संख्या 50 से बढ़कर 51 हो गई है। लोकायुक्त की टीम जमीन की खरीद से संबंधित दस्तावेजों और भुगतान के स्रोतों की पड़ताल कर रही है।

सरकारी दर और बाजार कीमत में बड़ा अंतर

जांच में सामने आई 51 अचल संपत्तियों की सरकारी गाइडलाइन के अनुसार कुल कीमत लगभग 19.94 करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं, इनका अनुमानित वर्तमान बाजार मूल्य करीब 68.01 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, फिरोज खान और उससे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 21.65 करोड़ रुपये बताया गया है।इन आंकड़ों के आधार पर लोकायुक्त यह पता लगाने में जुटी है कि संपत्तियां खरीदने के लिए धन कहां से आया और उनका वास्तविक स्वामित्व किन लोगों के पास है। जांच में फिरोज खान के परिवार के सदस्यों, परिचितों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी पड़ताल की जा रही है।

14 अक्टूबर को शुरू हुई थी तलाशी की कार्रवाई

लोकायुक्त पुलिस ने 14 अक्टूबर 2026 को फिरोज खान और उससे जुड़े लोगों के विभिन्न ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इसके बाद संपत्तियों के दस्तावेजों, रजिस्ट्रियों, बैंक खातों और निवेश से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई। जांच एजेंसी को अलग-अलग स्थानों पर जमीन और अन्य संपत्तियों से जुड़ी जानकारी मिली है।

मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसी संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत और संबंधित लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।फिलहाल जांच जारी है। संपत्तियों की वास्तविक स्थिति, उनके स्वामित्व और आय से अधिक संपत्ति होने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।