×

MP में हॉस्टल के लिए 47 करोड़ मंजूर, मिले सिर्फ 98 लाख; जमीन खाली नहीं करा पाए अफसर, कागजों में अटका प्रोजेक्ट

 

मध्य प्रदेश में छात्रावास निर्माण से जुड़ी एक योजना सरकारी तंत्र की सुस्ती और बजट की कमी के कारण जमीन पर उतरती नजर नहीं आ रही है। परियोजना के लिए करीब 47 करोड़ रुपए की राशि मंजूर होने के बावजूद अब तक सिर्फ 98 लाख रुपए ही उपलब्ध हो सके हैं। वहीं, निर्माण के लिए प्रस्तावित जमीन को भी अधिकारी अब तक पूरी तरह खाली नहीं करा पाए हैं।

इसके चलते हॉस्टल निर्माण का प्रोजेक्ट फिलहाल कागजों में ही अटका हुआ है। छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई योजना की धीमी रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।

47 करोड़ की मंजूरी, लेकिन खाते में पहुंचे 98 लाख

जानकारी के मुताबिक हॉस्टल निर्माण के लिए सरकार की ओर से करीब 47 करोड़ रुपए की प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। इतनी बड़ी राशि स्वीकृत होने के बाद उम्मीद थी कि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो जाएगा।

लेकिन परियोजना के लिए अब तक सिर्फ 98 लाख रुपए ही जारी किए गए हैं। इतनी कम राशि में बड़े स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करना संभव नहीं है। बजट की अगली किस्त का इंतजार किया जा रहा है।

जमीन खाली कराने में भी अड़चन

परियोजना की राह में सिर्फ बजट ही बाधा नहीं है। हॉस्टल निर्माण के लिए जिस जमीन का चयन किया गया है, उस पर भी पूरी तरह से कब्जा नहीं मिल पाया है।

अधिकारियों को जमीन खाली कराकर निर्माण एजेंसी को सौंपना था, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। जमीन से जुड़े मामलों के कारण प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

कागजों में ही अटका हॉस्टल

बजट और जमीन दोनों मोर्चों पर अड़चन के चलते हॉस्टल निर्माण का काम शुरू नहीं हो सका है। परियोजना की स्वीकृति और बजट आवंटन कागजों में दर्ज है, लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

यदि समय पर जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई और पर्याप्त बजट जारी नहीं हुआ तो परियोजना में और देरी हो सकती है।

छात्रों को करना पड़ रहा इंतजार

हॉस्टल निर्माण का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। खासकर दूरदराज क्षेत्रों से पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों के लिए छात्रावास महत्वपूर्ण होते हैं।

लेकिन परियोजना के लंबित रहने से विद्यार्थियों को प्रस्तावित सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में अब अधिकारियों के सामने जमीन खाली कराने और शेष बजट जारी कराने की चुनौती है।

समय पर पूरा करना बड़ी चुनौती

करीब 47 करोड़ रुपए की परियोजना में अभी तक सिर्फ 98 लाख रुपए मिलने और जमीन भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने से निर्माण कार्य की गति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक जमीन की बाधा दूर कर शेष राशि उपलब्ध कराता है।