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शिवपुरी के नरवर किले से 400 साल पुरानी 3.5 टन की ऐतिहासिक तोप चोरी, फुटेज में देंखे अंतरराष्ट्रीय एंटीक गैंग पर शक

 

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से इतिहास और विरासत से जुड़ी एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। जिले के प्रसिद्ध नरवर किले से सिंधिया रियासत की करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई। हैरानी की बात यह है कि बदमाश करीब 3,500 किलो (3.5 टन) वजनी इस विशाल तोप को पूरी प्लानिंग के साथ किले से निकालकर फरार हो गए। शुरुआती अनुमान के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत 3 से 5 करोड़ रुपये तक हो सकती है। पुलिस और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह वारदात 15 जुलाई की रात को हुई। चोरों ने नरवर किले की ओपन कचहरी में रखी 16वीं शताब्दी की इस दुर्लभ तोप को बेहद सुनियोजित तरीके से चोरी किया।

गद्दों में लपेटकर नीचे उतारी गई तोप

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जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सबसे पहले तोप को नुकसान से बचाने और आवाज कम करने के लिए उसे गद्दों में लपेटा। इसके बाद बैरिंग लगी लोहे की विशेष ट्रॉली की मदद से करीब 3 हजार फीट नीचे उतारा गया। नीचे पहले से मौजूद एक लोडिंग वाहन में तोप को चढ़ाकर आरोपी मौके से फरार हो गए।इतनी भारी तोप को किले से निकालने के लिए कई लोगों और विशेष उपकरणों की जरूरत पड़ी होगी। इससे साफ है कि चोरी की पूरी साजिश पहले से तैयार की गई थी।

सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने का उठाया फायदा

घटना के समय नरवर किले में कोई सुरक्षाकर्मी तैनात नहीं था। चोरों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाया और बिना किसी रोक-टोक के पूरी वारदात को अंजाम दे दिया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किले में नियमित सुरक्षा व्यवस्था होती तो इतनी बड़ी चोरी को रोका जा सकता था।

इंटरनेशनल एंटीक तस्करों पर शक

पुलिस को आशंका है कि इस चोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय एंटीक ब्लैक मार्केट से जुड़े संगठित गिरोह का हाथ हो सकता है। ऐतिहासिक और दुर्लभ धरोहरों की तस्करी करने वाले गिरोह पहले भी देश के कई हिस्सों में ऐसी घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।घटनास्थल के बाहर भारी वाहनों के टायरों के निशान मिले हैं, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि तोप को बड़े ट्रक या विशेष लोडिंग वाहन में ले जाया गया। पुलिस इन निशानों और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

ऐतिहासिक धरोहर थी यह तोप

चोरी हुई तोप को सिंधिया रियासत के दौर की महत्वपूर्ण सैन्य धरोहर माना जाता है। करीब 400 साल पुरानी यह तोप नरवर किले की पहचान और आकर्षण का प्रमुख केंद्र थी। इतिहासकारों के अनुसार, ऐसी ऐतिहासिक वस्तुएं केवल आर्थिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और पुरातात्विक दृष्टि से भी अमूल्य होती हैं।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर दी गई है, जबकि अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सूचना साझा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि चोरी में शामिल लोगों की पहचान के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक साक्ष्यों की मदद ली जा रही है।यह घटना न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश की ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस इस बेशकीमती विरासत को कब तक बरामद कर पाती है और इस संगठित चोरी के पीछे छिपे नेटवर्क का खुलासा कब होता है।