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एक मठ के पते से 40+ पासपोर्ट, कोई वेरिफिकेशन नहीं: भंते बोले- न पुलिस आई, न STF; हमें जानकारी ही नहीं कि कैसे बन गए

 

एक मठ के पते का इस्तेमाल कर 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने का मामला सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि मठ प्रबंधन के मुताबिक पासपोर्ट बनवाने के लिए उनके यहां न तो पुलिस वेरिफिकेशन के लिए कोई पहुंचा और न ही STF की टीम ने कोई जानकारी ली। मठ के भंते का कहना है कि उन्हें यह तक पता नहीं है कि उनके पते पर इतने लोगों के पासपोर्ट आखिर कैसे बन गए।

मामला सामने आने के बाद पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया और पते के सत्यापन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सामान्य तौर पर पासपोर्ट बनवाते समय आवेदक के पते की जांच महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। ऐसे में एक ही मठ के पते पर बड़ी संख्या में पासपोर्ट जारी होने और कथित तौर पर स्थानीय स्तर पर वेरिफिकेशन नहीं होने की बात सामने आने से सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मठ प्रबंधन को नहीं थी जानकारी

मठ के भंते के मुताबिक, उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि उनके पते का इस्तेमाल इतने लोगों के पासपोर्ट बनवाने में किया गया है। उन्होंने दावा किया कि न पुलिस उनके पास वेरिफिकेशन के लिए आई और न ही STF की ओर से इस संबंध में कोई पूछताछ की गई।

अब जांच का मुख्य सवाल यही है कि पासपोर्ट आवेदनों में यह पता किस आधार पर दर्ज किया गया और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारियों ने क्या जांच की।

जांच के दायरे में प्रक्रिया

एक ही पते से 40 से ज्यादा पासपोर्ट जारी होने की जानकारी सामने आने के बाद संबंधित विभागों की भूमिका भी जांच के घेरे में आ सकती है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि इन पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले लोग वास्तव में उस पते पर रहते थे या नहीं।

इसके अलावा यह भी जांच का विषय होगा कि आवेदनों में दिए गए दस्तावेज किसने उपलब्ध कराए और पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया किस तरह पूरी हुई। यदि वेरिफिकेशन वास्तव में नहीं हुआ है तो यह पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में गंभीर चूक का मामला हो सकता है।

फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मठ प्रबंधन को 40 से ज्यादा लोगों के पासपोर्ट बनने की जानकारी तक नहीं थी, तो इन आवेदनों का सत्यापन कैसे हुआ? जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि यह महज दस्तावेजी लापरवाही थी या इसके पीछे कोई सुनियोजित खेल था।