8 राज्यों में दो साल में 37 नॉन-SAS बने IAS, MP में 10 साल से नहीं मिला मौका; अब फिर तेज हुई कवायद
मध्यप्रदेश में स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस यानी SAS के अधिकारियों को प्रमोशन के जरिए IAS बनने का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। पिछले करीब 10 वर्षों से प्रदेश में SAS कैडर के अधिकारियों को नॉन-SAS कोटे से IAS में नियुक्ति का अवसर नहीं मिला है। वहीं, देश के आठ राज्यों में पिछले दो वर्षों के दौरान 37 अधिकारियों को नॉन-SAS कोटे के तहत IAS बनाया गया है। ऐसे में मध्यप्रदेश में भी इस प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर जोर आजमाइश शुरू हो गई है।
माना जा रहा है कि SAS अधिकारियों की डीपीसी यानी विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया के बीच नॉन-SAS कोटे को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है। अधिकारियों की नजर अब इस बात पर है कि प्रदेश में लंबे समय से लंबित इस अवसर पर सरकार और संबंधित विभाग क्या निर्णय लेते हैं।
आठ राज्यों में 37 अधिकारियों को मिला मौका
उपलब्ध जानकारी के अनुसार पिछले दो वर्षों में आठ राज्यों में कुल 37 अधिकारियों को नॉन-SAS कैटेगरी से IAS कैडर में शामिल किया गया है। यह प्रक्रिया संबंधित राज्यों में निर्धारित नियमों और चयन प्रक्रिया के तहत पूरी की गई। इसके बाद मध्यप्रदेश के SAS अधिकारियों के बीच भी उम्मीद जगी है कि प्रदेश में लंबे समय से रुकी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
नॉन-SAS कोटे के तहत विभिन्न राज्य सेवाओं में कार्यरत पात्र अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार IAS कैडर में शामिल किए जाने का प्रावधान है। इसके लिए अधिकारियों की सेवा अवधि, अनुभव, रिकॉर्ड और अन्य निर्धारित मापदंडों को ध्यान में रखा जाता है।
MP में दस साल से इंतजार
मध्यप्रदेश में SAS अधिकारियों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि करीब एक दशक से नॉन-SAS कोटे के तहत IAS बनने का मौका नहीं मिला है। लंबे समय से इंतजार कर रहे अधिकारियों के बीच अब डीपीसी की कवायद शुरू होने से उम्मीदें बढ़ी हैं।
SAS अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक प्रशासनिक सेवा में काम करने वाले योग्य अधिकारियों को नियमानुसार पदोन्नति का अवसर मिलना चाहिए। इससे न केवल अधिकारियों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा, बल्कि प्रशासनिक अनुभव का भी व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा सकेगा।
डीपीसी की कवायद के बीच बढ़ी सक्रियता
प्रदेश में SAS अधिकारियों की डीपीसी को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने की चर्चा के बीच नॉन-SAS से IAS बनने के मुद्दे पर भी सक्रियता बढ़ गई है। संबंधित अधिकारी और प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को लेकर संभावित प्रक्रिया और पात्रता पर नजर रखे हुए हैं।
अब देखना होगा कि मध्यप्रदेश में नॉन-SAS कोटे के तहत IAS नियुक्ति को लेकर सरकार किस तरह आगे बढ़ती है। यदि प्रक्रिया शुरू होती है तो लंबे समय से इंतजार कर रहे SAS अधिकारियों को बड़ी राहत मिल सकती है। साथ ही इससे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में अनुभवी अधिकारियों को उच्च जिम्मेदारियों में काम करने का अवसर मिलने की संभावना बढ़ेगी।