मिठाई के डिब्बे में 2 पिस्टल, सरसों के तेल के डिब्बों में छिपाए 700 कारतूस; मैनपुरी से मंदसौर लाई जा रही थी खेप
हथियारों की अंतरराज्यीय तस्करी का एक चौंकाने वाला तरीका सामने आया है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से मध्य प्रदेश के मंदसौर तक हथियारों और कारतूसों की खेप पहुंचाने के लिए मिठाई और सरसों के तेल के डिब्बों का इस्तेमाल किया जा रहा था। जानकारी के मुताबिक, मिठाई के डिब्बे में दो पिस्टल छिपाई गई थीं, जबकि सरसों के तेल से भरे डिब्बों में 700 जिंदा कारतूस छिपाकर ले जाए जा रहे थे।
इस मामले में रोजमर्रा के सामान के बीच हथियारों को छिपाकर एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने का तरीका सामने आया है। सामान्य तौर पर मिठाई और तेल के डिब्बे घरेलू इस्तेमाल की वस्तुओं के रूप में देखे जाते हैं, लेकिन इस खेप में कथित तौर पर इनका इस्तेमाल हथियारों और कारतूसों को छिपाने के लिए किया जा रहा था।
मैनपुरी से मंदसौर तक पहुंचाई जा रही थी खेप
जानकारी के अनुसार, हथियारों की यह खेप उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से मध्य प्रदेश के मंदसौर लाई जा रही थी। खेप में दो पिस्टल और 700 जिंदा कारतूस शामिल बताए गए हैं। पिस्टल को मिठाई के डिब्बे में छिपाया गया था, जबकि कारतूस सरसों के तेल से भरे डिब्बों में रखे गए थे।
हथियारों और कारतूसों की इतनी बड़ी संख्या में आवाजाही ने अंतरराज्यीय तस्करी के नेटवर्क को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि हथियार किसे सौंपे जाने थे और इस खेप के पीछे किन लोगों की भूमिका थी।
तस्करी के नेटवर्क की जांच अहम
इस तरह के मामलों में हथियारों के स्रोत, उन्हें उपलब्ध कराने वाले लोगों, परिवहन में शामिल व्यक्तियों और संभावित खरीदारों की जानकारी जुटाना महत्वपूर्ण होता है। मैनपुरी से मंदसौर तक हथियार पहुंचाने के मामले में भी इन पहलुओं की जानकारी सामने आने पर तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता चल सकता है।
दो पिस्टल के साथ 700 जिंदा कारतूस की खेप मिलने की जानकारी सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर है। अवैध हथियारों की खरीद-बिक्री और परिवहन पर कानून के तहत कार्रवाई की जाती है। जांच के दौरान यह पता लगाना अहम होगा कि हथियार कहां से आए और उन्हें मंदसौर में किस उद्देश्य से पहुंचाया जा रहा था।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मिठाई और सरसों के तेल के डिब्बों में छिपाकर हथियारों तथा कारतूसों को मंदसौर लाने का मामला सामने आया है। आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मिलने पर मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।