1 लाख आबादी को मिलेगा फायदा: 72 प्रतिशत काम पूरा, मार्च तक शुरू होगा प्रदेश का पहला 400 केवी जीआईएस सब स्टेशन
प्रदेश में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। प्रदेश का पहला 400 केवी गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन (GIS) अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का करीब 72 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और अधिकारियों का दावा है कि इसे मार्च तक शुरू कर दिया जाएगा। सब स्टेशन शुरू होने के बाद करीब 1 लाख की आबादी को बेहतर और अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
जीआईएस तकनीक पर आधारित यह सब स्टेशन आधुनिक बिजली तंत्र का हिस्सा है। सामान्य सब स्टेशनों की तुलना में जीआईएस सब स्टेशन के लिए कम जगह की जरूरत होती है और इसमें बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकता है। देश में कई बड़े ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
तेजी से चल रहा निर्माण कार्य
अधिकारियों के अनुसार, सब स्टेशन निर्माण का काम निर्धारित योजना के तहत आगे बढ़ रहा है। अब तक 72 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। शेष कार्यों में उपकरणों की स्थापना, तकनीकी परीक्षण और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं शामिल हैं। लक्ष्य रखा गया है कि मार्च तक इसे चालू कर दिया जाए।
इस सब स्टेशन के शुरू होने के बाद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की क्षमता बढ़ेगी और बढ़ते बिजली भार को संभालने में मदद मिलेगी। आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और नए व्यावसायिक क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आधुनिक तकनीक से होगी बिजली सप्लाई मजबूत
गैस इंसुलेटेड सब स्टेशन में पारंपरिक एयर इंसुलेटेड सब स्टेशन (AIS) की तुलना में कई तकनीकी फायदे होते हैं। कम जगह में अधिक क्षमता का सिस्टम स्थापित किया जा सकता है। इसके अलावा खराब मौसम और बाहरी प्रभावों से सुरक्षा भी बेहतर रहती है।
बिजली क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए देशभर में उच्च क्षमता वाले सब स्टेशनों और ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। पावर ग्रिड के अनुसार देश में बड़ी संख्या में 400 केवी स्तर के सब स्टेशन और जीआईएस सुविधाएं संचालित हो रही हैं।
बिजली कटौती में आएगी कमी
स्थानीय लोगों को लंबे समय से बेहतर बिजली व्यवस्था की जरूरत महसूस हो रही थी। नए 400 केवी जीआईएस सब स्टेशन के शुरू होने के बाद बिजली वितरण नेटवर्क पर दबाव कम होगा। इससे वोल्टेज की समस्या और अचानक होने वाली बिजली कटौती में कमी आने की उम्मीद है।
इसके अलावा आपात स्थिति में बिजली आपूर्ति को दूसरे स्रोतों से जोड़ने की सुविधा भी बेहतर होगी। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योग, व्यापार और अन्य संस्थानों को भी फायदा मिलेगा।
मार्च में शुरू होने की तैयारी
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को तय समय पर पूरा करने के लिए निर्माण एजेंसियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। शेष काम पूरा होने के बाद तकनीकी जांच और ट्रायल रन किया जाएगा। इसके बाद इसे आम बिजली नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।
करीब 1 लाख लोगों की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 400 केवी जीआईएस सब स्टेशन शुरू होने के बाद बिजली व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत, सुरक्षित और आधुनिक हो जाएगी।