केरल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग से संबंध के आरोपी को शादी का हवाला देकर राहत नहीं, वीडियो में देंखे POCSO केस रद्द करने से इनकार
केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से शारीरिक शोषण के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी यह दावा करके कानूनी कार्रवाई से नहीं बच सकता कि नाबालिग पीड़िता उसकी पत्नी है। कोर्ट ने कहा कि लड़की की उम्र 18 साल से कम होने की स्थिति में वैवाहिक संबंध POCSO कानून के तहत आपराधिक जिम्मेदारी से सुरक्षा नहीं देता।
जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने 19 अगस्त 2026 को दिए अपने आदेश में यह टिप्पणी की। मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज केस को खत्म करने की मांग की थी। आरोपी की दलील थी कि नाबालिग लड़की उसकी कानूनी पत्नी है और दोनों की शादी मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी।
आरोपी ने शादी को बनाया बचाव का आधार
आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 375 और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस एक्ट यानी POCSO की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोपी ने हाईकोर्ट में दलील दी कि चूंकि लड़की से उसकी शादी मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के तहत हुई थी, इसलिए उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई जारी नहीं रहनी चाहिए।हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी भी वैवाहिक दावे से POCSO कानून के तहत नाबालिग को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा खत्म नहीं हो जाती।
18 साल से कम उम्र होने पर POCSO लागू
कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात को महत्वपूर्ण माना कि कथित शादी और शारीरिक संबंध बनाए जाने के समय लड़की की उम्र 17 साल थी। यानी वह कानून के अनुसार अभी बालिग नहीं हुई थी।अदालत ने कहा कि अगर आरोपी की इस दलील को भी मान लिया जाए कि शादी मुस्लिम धार्मिक रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार हुई थी, तब भी इससे उसकी आपराधिक जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। नाबालिग के मामले में POCSO कानून की सुरक्षा वैवाहिक संबंध के आधार पर खत्म नहीं की जा सकती।
मुस्लिम पर्सनल लॉ की दलील नहीं मानी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत कानून और आपराधिक कानून के बीच अंतर को समझना जरूरी है। आरोपी की ओर से मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत शादी को आधार बनाकर राहत मांगने की कोशिश की गई थी, लेकिन अदालत ने कहा कि नाबालिग के साथ यौन संबंध के मामले में POCSO कानून लागू होता है।अदालत का यह फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चे को POCSO अधिनियम के तहत विशेष कानूनी संरक्षण प्राप्त है। केवल शादी का दावा करके इस कानून के प्रावधानों से बचा नहीं जा सकता।इस फैसले के साथ केरल हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका खारिज कर दी और उसके खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया। अदालत की टिप्पणी नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।