मानसून को लेकर बड़ी खबर: फुटेज में जानें 26 मई तक केरल पहुंच सकता है, अल नीनो से मौसम पर असर की आशंका
मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून अपने निर्धारित समय से करीब 4 दिन पहले, यानी 26 मई तक केरल तट पर दस्तक दे सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो देश में बारिश के मौसम की शुरुआत सामान्य से पहले हो जाएगी, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर शुरुआती राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि दूसरी ओर मौसम को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। अमेरिकी मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल ‘सुपर अल नीनो’ की स्थिति बनने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। यह स्थिति वैश्विक मौसम पैटर्न पर गहरा असर डाल सकती है।
अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर के सतही पानी के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण उत्पन्न होती है। इसका सीधा असर वायुमंडलीय दबाव और हवाओं की दिशा पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में मानसूनी हवाएं समुद्र से नमी लेकर भारत की ओर बढ़ती हैं, लेकिन अल नीनो के दौरान यह पैटर्न कमजोर हो जाता है या बदल जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है। इसका परिणाम कम बारिश, लंबे सूखे के दौर और हीटवेव की अधिक घटनाओं के रूप में सामने आ सकता है। इससे न केवल कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, बल्कि जल संकट और तापमान में बढ़ोतरी की समस्या भी गंभीर हो सकती है।
दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों पर भी इसका असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जहां सामान्य से कम वर्षा और अधिक गर्मी देखने को मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव हर बार समान नहीं होता, लेकिन इसका वैश्विक जलवायु पर महत्वपूर्ण असर जरूर पड़ता है।
भारत के लिए मानसून हमेशा से आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और अधिकांश खेती बारिश पर आधारित होती है। ऐसे में मानसून की मात्रा और समय दोनों ही कृषि उत्पादन को सीधे प्रभावित करते हैं।
मौसम विभाग फिलहाल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आने वाले हफ्तों में और अधिक स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। शुरुआती बारिश के अनुमान के बावजूद अल नीनो की वजह से पूरे मानसून सीजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।