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केरल विवाद थमा तो कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर फिर बढ़ी हलचल, सिद्धारमैया–डीके शिवकुमार के बीच तनाव की चर्चा

 

केरल से जुड़े राजनीतिक मसले के शांत होने के बाद अब कांग्रेस के लिए कर्नाटक में अंदरूनी चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर एक बार फिर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच मतभेद और राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच संगठनात्मक फैसलों और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर असहमति की स्थिति बनी हुई है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी बड़े विवाद की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।

 नेतृत्व संतुलन पर नजर

कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता संतुलन को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है। दोनों नेता पार्टी के भीतर मजबूत जनाधार और प्रभाव रखते हैं, जिसके चलते निर्णय प्रक्रिया में तालमेल बनाए रखना पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती माना जाता है।

पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि हाल के दिनों में विभागीय फैसलों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को लेकर मतभेद की स्थिति फिर से उभरती दिख रही है।

 दिल्ली नेतृत्व की भूमिका अहम

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी हाईकमान पहले भी दोनों नेताओं के बीच संतुलन बनाकर चलने की कोशिश कर चुका है। अब एक बार फिर से संगठन को हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित करना पड़ सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्य में किसी भी तरह का आंतरिक तनाव सरकार की स्थिरता और प्रशासनिक गति पर असर डाल सकता है।

 विपक्ष भी रख रहा नजर

विपक्षी दल भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि अंदरूनी मतभेद लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो इसका असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है।