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आज अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, दिल्ली से लौटकर राज्यपाल से मिलने का समय मांगा
 

 

कर्नाटक की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के इस्तीफे की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली दौरे से लौटने के बाद उन्होंने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है, जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह आज अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। हालांकि अब तक इसको लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल के भीतर कई मुद्दों को लेकर लगातार बैठकों का दौर चल रहा था। दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के साथ हुई चर्चा के बाद सियासी घटनाक्रम और तेज हो गया। मुख्यमंत्री के राज्यपाल से मुलाकात के अनुरोध ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व राज्य में संगठन और सरकार के स्तर पर कुछ बड़े बदलावों पर विचार कर रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री के संभावित इस्तीफे की चर्चा ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य सरकार के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आने लगा है।

हालांकि सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं ने इस्तीफे की खबरों को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की राज्यपाल से मुलाकात सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा भी हो सकती है। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में इस मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

सिद्दरमैया राज्य की राजनीति के बड़े और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उनके नेतृत्व में सरकार ने कई योजनाओं और घोषणाओं को आगे बढ़ाया है। ऐसे में यदि वह इस्तीफा देते हैं तो इसका असर राज्य की राजनीति पर व्यापक रूप से पड़ सकता है। साथ ही नए नेतृत्व को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

दिल्ली दौरे के दौरान पार्टी हाईकमान के साथ हुई बैठकों को भी काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि राज्य की राजनीतिक स्थिति, संगठनात्मक समीकरण और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई है। हालांकि पार्टी की ओर से आधिकारिक रूप से किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देते हैं तो राज्य में सत्ता और नेतृत्व को लेकर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो सकती है। इससे विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका मिलेगा। वहीं सत्तारूढ़ दल के सामने संगठनात्मक संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।

फिलहाल सभी की नजर मुख्यमंत्री सिद्दरमैया और राज्यपाल की संभावित मुलाकात पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ घंटे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अब देखना होगा कि इस्तीफे की अटकलें सच साबित होती हैं या यह सिर्फ राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित रहती हैं।