यशवंत सिन्हा ने BRICS सम्मेलन की तारीफ की, मोदी सरकार के काम को सराहा; चीन को लेकर भी कही बड़ी बा
पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन को सफल बताया। उन्होंने भारत की कूटनीतिक भूमिका की तारीफ की और चीन के साथ बातचीत जारी रखने की बात कही, लेकिन भरोसे को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी।
पूर्व केंद्रीय वित्त और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर भारत की भूमिका की सराहना की है। लंबे समय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे सिन्हा ने इस बार सम्मेलन को भारत के लिए सफल बताया। उन्होंने कहा कि BRICS बैठक में भारत ने अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभाई और चीन समेत प्रमुख देशों के साथ बातचीत का मंच उपलब्ध कराया।
यशवंत सिन्हा ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में सम्मेलन की सफलता के कई पहलुओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन देशों के राष्ट्राध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था, उनमें से प्रमुख नेता भारत पहुंचे। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी शामिल थे। उनके मुताबिक, सम्मेलन के बाद संयुक्त घोषणापत्र जारी होना भी महत्वपूर्ण रहा।
चीन के साथ बातचीत पर क्या बोले सिन्हा
यशवंत सिन्हा ने भारत और चीन के संबंधों को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहनी चाहिए, लेकिन भारत को चीन के मामले में सतर्क रहने की जरूरत है। उनके मुताबिक, अतीत में भारत और चीन के बीच कई मुद्दों पर तनाव रहा है, इसलिए संवाद के साथ सावधानी भी जरूरी है।
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई। सरकारी जानकारी के अनुसार, दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में स्थिरता और सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने और संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
संयुक्त घोषणापत्र को बताया महत्वपूर्ण
सिन्हा ने BRICS सम्मेलन के दौरान संयुक्त घोषणापत्र जारी होने को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विभिन्न देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठकें हुईं और कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई। उनके मुताबिक, इन बैठकों और घोषणापत्र से भारत को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताएं रखने का अवसर मिला।
ईरान और पश्चिम एशिया का भी किया जिक्र
पूर्व विदेश मंत्री ने BRICS सम्मेलन में ईरान की भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का भारत आना महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति और गाजा का संयुक्त घोषणापत्र में उल्लेख होने की बात भी कही।
BRICS सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हुआ था। इसमें 11 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन व्यवस्था, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
यशवंत सिन्हा की टिप्पणी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह पिछले वर्षों में मोदी सरकार की नीतियों के आलोचक रहे हैं। इस बार उन्होंने सरकार के कार्यकाल में आयोजित BRICS सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक भूमिका की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। हालांकि, चीन के साथ संबंधों को लेकर उन्होंने बातचीत के साथ सतर्कता बरतने की बात भी कही है।