मैथन और पंचेत डैम का बढ़ा जलस्तर, खतरे के निशान से सिर्फ 10 फीट नीचे; प्रशासन अलर्ट
झारखंड में लगातार हो रही बारिश का असर अब प्रमुख जलाशयों पर भी दिखाई देने लगा है। पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण मैथन और पंचेत डैम का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। पिछले सप्ताह की तुलना में दोनों जलाशयों में करीब 10 फीट पानी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जलस्तर में लगातार वृद्धि के बाद दोनों डैम अब खतरे के निशान से महज 10 फीट नीचे रह गए हैं।
डैमों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल प्रबंधन अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है। लगातार बारिश जारी रहने पर जलस्तर और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
तीन दिनों की बारिश से बढ़ा पानी
जानकारी के अनुसार, पिछले तीन दिनों से क्षेत्र में लगातार तेज बारिश हो रही है। इसके कारण डैम के कैचमेंट एरिया से बड़ी मात्रा में पानी जलाशयों में पहुंच रहा है। यही वजह है कि मैथन और पंचेत डैम के जलस्तर में अचानक तेजी से वृद्धि हुई है।पिछले सप्ताह की तुलना में दोनों डैमों में करीब 10 फीट पानी बढ़ चुका है। बारिश का सिलसिला जारी रहने पर जलाशयों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।
खतरे के निशान के करीब पहुंचे डैम
मैथन और पंचेत डैम क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलाशय हैं। दोनों डैमों का जलस्तर खतरे के निशान से सिर्फ 10 फीट नीचे रह गया है। ऐसे में अधिकारियों की निगाह लगातार जलस्तर पर बनी हुई है।डैमों में पानी की स्थिति को देखते हुए संभावित आपात परिस्थितियों के लिए भी तैयारियां की जा रही हैं। आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा सकती है।
निचले इलाकों में बढ़ी चिंता
जलस्तर बढ़ने के साथ ही डैम के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि बारिश लगातार जारी रही और जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है तो जल निकासी या पानी छोड़े जाने की स्थिति बन सकती है।प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी और जलाशय के आसपास के क्षेत्रों में सावधानी बरतें।
अधिकारियों की स्थिति पर नजर
डैम प्रबंधन से जुड़े अधिकारी लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। बारिश की स्थिति और पानी की आवक के आधार पर आगे के फैसले लिए जाएंगे।फिलहाल मैथन और पंचेत डैम खतरे के निशान से नीचे हैं, लेकिन जिस तेजी से जलस्तर बढ़ रहा है, उसे देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति ही तय करेगी कि जलाशयों में पानी का स्तर किस दिशा में जाएगा।