झारखंड के 15 शहरों का बदलेगा नक्शा, ड्रोन से होगी मैपिंग; 20-25 साल की जरूरतों के हिसाब से बनेगा मास्टर प्लान
झारखंड में तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए राजधानी रांची समेत करीब 15 शहरों के मास्टर प्लान को नए सिरे से तैयार करने की तैयारी है। नई शहरी योजना में अगले 20 से 25 वर्षों की ट्रैफिक, आवासीय, व्यावसायिक और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके लिए शहरों की मौजूदा स्थिति का आकलन पुराने नक्शों के बजाय ड्रोन सर्वे और GIS मैपिंग के जरिए करने की योजना है।
रांची समेत 15 शहर होंगे योजना में शामिल
नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देश पर नए मास्टर प्लान को लेकर तैयारी की जा रही है। योजना में शहरों की मौजूदा सीमा के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे आसपास के इलाकों को भी नियोजन क्षेत्र में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
रांची में मौजूदा मास्टर प्लान की सीमा से बाहर करीब 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में आने वाले लगभग 100 से 120 गांवों को प्रस्तावित प्लान में शामिल करने की तैयारी है। नगर परिषद और नगर पंचायतों के आसपास तेजी से विकसित हो रहे इलाकों को भी भविष्य की शहरी योजना का हिस्सा बनाया जा सकता है।
ड्रोन से होगी जमीन और सड़क नेटवर्क की मैपिंग
नए मास्टर प्लान के लिए ड्रोन या UAV तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए सड़कों, नई कॉलोनियों, खाली जमीन, आवासीय क्षेत्रों, व्यावसायिक गतिविधियों और तेजी से हो रहे निर्माण की मौजूदा स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
रांची में करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की मैपिंग प्रस्तावित है। इसके अलावा गुमला में 87, गढ़वा में 78, गोड्डा में 77, पाकुड़ में 75 और चतरा में करीब 72 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की मैपिंग किए जाने की योजना बताई गई है।
ट्रैफिक दबाव कम करने पर भी फोकस
नई योजना में शहरों में बढ़ते यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए अर्बन कॉरिडोर और बेहतर परिवहन नेटवर्क की पहचान की जाएगी। प्रमुख सड़कों, ट्रैफिक पैटर्न और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अध्ययन कर भविष्य के लिए परिवहन योजना तैयार की जाएगी।
झारखंड सरकार की ओर से रांची के विकास को लेकर पहले ही सड़क नेटवर्क, फ्लाईओवर, ड्रेनेज, चौक-चौराहों और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दीर्घकालिक योजना पर जोर दिया गया है। सरकार ने सड़क निर्माण में भविष्य की जरूरतों के लिए पर्याप्त जगह रखने और पैदल यात्रियों के लिए भी प्रावधान करने के निर्देश दिए हैं।
TOD मॉडल से जुड़ेगा शहरों का विकास
नए मास्टर प्लान में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD मॉडल को भी शामिल करने की तैयारी है। इसके तहत सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास आवासीय, व्यावसायिक और नागरिक सुविधाओं का नियोजित विकास किया जाएगा।
इसका उद्देश्य शहरों में लोगों की रोजाना आवाजाही को आसान बनाना और जरूरी सुविधाओं को सार्वजनिक परिवहन तथा पैदल पहुंच के दायरे में विकसित करना है।
मिक्स यूज डेवलपमेंट पर जोर
भविष्य की आवासीय और व्यावसायिक जरूरतों को देखते हुए मिक्स यूज डेवलपमेंट को भी बढ़ावा देने की योजना है। इसमें आवासीय इलाकों के साथ बाजार, कार्यालय और जरूरी नागरिक सुविधाओं को नियोजित तरीके से विकसित करने पर जोर रहेगा।
राज्य सरकार ने भी शहरों की योजना बनाते समय सड़क, यातायात, ड्रेनेज, स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक परिवहन, पार्क और हरित क्षेत्र जैसे पहलुओं को एक साथ शामिल करने की जरूरत बताई है।
नए मास्टर प्लान का उद्देश्य शहरों के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करना और आने वाले दशकों की जरूरतों के हिसाब से बुनियादी ढांचा तैयार करना है। हालांकि संशोधित मास्टर प्लान लागू होने तक संबंधित शहरों में मौजूदा मास्टर प्लान ही प्रभावी रहेगा।