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हसुआ ले महाजन के पीछे दौड़ीं, बच्चा गोद में ले जंगल में पति को खोजती रहीं; रूपी सोरेन के संघर्ष की 2 कहानियां
 

 

रूपी सोरेन की जिंदगी सिर्फ एक राजनीतिक परिवार से जुड़ी महिला की कहानी नहीं रही, बल्कि संघर्ष, साहस और मुश्किल परिस्थितियों से जूझने की मिसाल भी रही। झारखंड के आंदोलन और संघर्ष के दौर में उन्होंने परिवार को संभालने के साथ कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उनके जीवन से जुड़ी दो घटनाएं आज भी उनके संघर्ष की तस्वीर पेश करती हैं।

पहली कहानी महाजन से जुड़ी है। बताया जाता है कि परिवार आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा था। उस दौर में महाजन का दबाव भी रहता था। एक घटना में जब महाजन अपना पैसा मांगने पहुंचा तो रूपी सोरेन ने पीछे हटने के बजाय उसका सामना किया। उनके हाथ में हसुआ था और वह महाजन के पीछे दौड़ पड़ीं। यह घटना उनके स्वभाव और मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं हारने की कहानी बताती है।

रूपी सोरेन के जीवन की दूसरी कहानी उनके पति शिबू सोरेन से जुड़ी है। आंदोलन और संघर्ष के दौर में शिबू सोरेन अक्सर घर से दूर रहते थे। कई बार उनके ठिकाने की जानकारी परिवार को भी नहीं होती थी। ऐसे ही एक दौर में रूपी सोरेन अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर जंगलों तक पहुंच गईं और पति को खोजती रहीं।

परिवार की जिम्मेदारी और पति के संघर्ष के बीच रूपी सोरेन ने बेहद कठिन परिस्थितियों में घर संभाला। एक तरफ बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी थी तो दूसरी तरफ शिबू सोरेन के आंदोलन और राजनीतिक संघर्ष के कारण परिवार को लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ता था।

रूपी सोरेन का जीवन उस दौर की तस्वीर भी दिखाता है जब झारखंड आंदोलन से जुड़े कई परिवारों को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों से गुजरना पड़ा। उन्होंने इन परिस्थितियों के बीच परिवार का साथ नहीं छोड़ा और मुश्किल समय में मजबूती से खड़ी रहीं।

इसी वजह से रूपी सोरेन को सिर्फ शिबू सोरेन की पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि उनके संघर्ष के दौर की साथी के तौर पर भी याद किया जाता है। उनके जीवन की ये घटनाएं बताती हैं कि झारखंड के राजनीतिक आंदोलन के पीछे सिर्फ नेताओं का संघर्ष नहीं था, बल्कि उनके परिवारों ने भी लंबे समय तक मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया।

रूपी सोरेन के निधन के बाद उनके जीवन से जुड़े ऐसे कई किस्से फिर चर्चा में हैं। इन घटनाओं में एक ऐसी महिला की तस्वीर दिखाई देती है, जिसने परिवार, आर्थिक कठिनाइयों और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अपनी भूमिका मजबूती से निभाई।