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न निकाह, न फेरे, नक्सलियों को शादी के लिए करानी पड़ती थी नसबंदी, सरेंडर के बाद खुलासा

 

नक्सली संगठनों की अंदरूनी व्यवस्था और वहां रहने वाले सदस्यों की जिंदगी से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे समय-समय पर सामने आते रहे हैं। अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने संगठन के भीतर शादी और पारिवारिक जीवन को लेकर लागू कथित नियमों के बारे में जानकारी दी है। उनके मुताबिक, संगठन में पारंपरिक तरीके से न तो निकाह होता था और न ही शादी के लिए फेरे या अन्य धार्मिक रस्में निभाई जाती थीं। इतना ही नहीं, शादी करने की अनुमति से पहले नसबंदी कराने की बात भी सामने आई है।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों के अनुसार, संगठन में व्यक्तिगत जीवन पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था। महिला और पुरुष कैडर के बीच संबंधों को लेकर भी संगठन की ओर से नियम बनाए गए थे। यदि किसी कैडर को किसी साथी के साथ रहने या शादी जैसा संबंध बनाने की अनुमति मिलती थी, तो उसके लिए संगठन की तय व्यवस्था का पालन करना पड़ता था।

बताया गया कि नक्सली संगठन में परिवार बढ़ाने की अनुमति नहीं थी। इसी वजह से शादी या लंबे समय तक साथ रहने की अनुमति पाने वाले कैडरों के लिए नसबंदी जैसी शर्त लागू होने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य संगठन के सदस्यों को पारिवारिक जिम्मेदारियों से दूर रखते हुए उन्हें पूरी तरह संगठन के लिए उपलब्ध रखना बताया गया।

सरेंडर करने वाले सदस्यों ने यह भी बताया कि संगठन में रिश्तों और निजी जिंदगी से जुड़े फैसले भी व्यक्तिगत इच्छा से नहीं लिए जाते थे। कैडरों के बीच संबंधों को लेकर वरिष्ठ स्तर पर निर्णय लिए जाने की बात सामने आई है। इस व्यवस्था में महिला कैडरों की निजी जिंदगी भी संगठन के नियंत्रण में रहने का दावा किया गया है।

नक्सली इलाकों में लंबे समय तक सक्रिय रहे सदस्यों के सरेंडर के बाद संगठन के अंदरूनी कामकाज से जुड़ी कई जानकारियां सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचती हैं। इन्हीं जानकारियों के आधार पर सुरक्षा एजेंसियां संगठन की कार्यप्रणाली, कैडरों की भर्ती, प्रशिक्षण और उनके निजी जीवन से जुड़े नियमों को समझने की कोशिश करती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, उग्रवादी संगठनों में कैडरों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित रहने की कई रिपोर्ट सामने आती रही हैं। संगठन अपनी विचारधारा और अनुशासन को बनाए रखने के लिए सदस्यों के निजी फैसलों पर भी प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, सरेंडर किए गए कैडरों के बयानों और सामने आई जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग मामलों में जरूरी होती है।

नक्सलियों के सरेंडर के बाद सामने आया यह कथित नियम संगठन के भीतर कैडरों की जिंदगी पर नियंत्रण की तस्वीर पेश करता है। नक्सली हिंसा और हथियारों के अलावा संगठन के अंदर निजी रिश्तों और पारिवारिक जीवन को लेकर किस तरह की व्यवस्था थी, इसे समझने के लिए ऐसे खुलासे सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम माने जा रहे हैं।