JPSC Paper Leak: पेपर लीक के लिए बनाया गया था खास सॉफ्टवेयर, CID जांच में बड़ा खुलासा; यूपी के नौकरी घोटाले जैसी थी साजिश
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की परीक्षा से जुड़े पेपर लीक मामले की जांच में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सीआईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि पेपर लीक करने के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम देने की तैयारी की गई थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश में सामने आए चर्चित नौकरी घोटाले की तर्ज पर साजिश रचने की कोशिश की गई थी। आरोपियों ने कथित तौर पर तकनीक का इस्तेमाल कर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की योजना बनाई थी। सॉफ्टवेयर की भूमिका और इसे तैयार करने वाले लोगों के बारे में सीआईडी की टीम जानकारी जुटा रही है।
पेपर लीक के लिए तैयार किया गया सॉफ्टवेयर
सीआईडी जांच के मुताबिक, आरोपियों ने पेपर लीक करने के लिए सामान्य तरीकों के बजाय तकनीकी माध्यम का सहारा लेने की योजना बनाई थी। इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सॉफ्टवेयर किसने तैयार किया, इसका इस्तेमाल किस तरह किया जाना था और पेपर को परीक्षार्थियों तक पहुंचाने के लिए कौन-कौन से तरीके अपनाए गए।
सॉफ्टवेयर से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच भी की जा रही है। इसके जरिए जांचकर्ताओं को आरोपियों के बीच संपर्क और पूरी योजना की जानकारी मिलने की उम्मीद है।
यूपी के नौकरी घोटाले की तर्ज पर साजिश
सीआईडी के अनुसार, जेपीएससी पेपर लीक की कथित साजिश में उत्तर प्रदेश में सामने आए नौकरी घोटाले जैसी रणनीति अपनाने की कोशिश की गई थी। जांच एजेंसी इस एंगल से भी पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या आरोपियों ने किसी पुराने मामले से तरीका सीखा था या किसी ऐसे नेटवर्क से जुड़े थे, जो पहले भी परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी कर चुका है।
तकनीकी साक्ष्य जुटा रही CID
मामले की जांच में अब डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। सीआईडी मोबाइल फोन, कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से मिले डेटा की जांच कर सकती है। इसके अलावा संदिग्धों के बीच हुई बातचीत और डिजिटल लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल वास्तव में पेपर लीक के लिए किया गया था या यह केवल योजना का हिस्सा था।
परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल
पेपर लीक के लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किए जाने के खुलासे ने प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले जहां पेपर लीक के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल होने की बात सामने आती थी, वहीं अब तकनीक के जरिए परीक्षा प्रणाली को निशाना बनाने की आशंका बढ़ रही है।
ऐसे मामलों से परीक्षार्थियों का भरोसा प्रभावित होता है और निष्पक्ष परीक्षा आयोजित करना बड़ी चुनौती बन जाता है। इसलिए जांच एजेंसियों के सामने न केवल आरोपियों की पहचान करना, बल्कि पूरे नेटवर्क का पता लगाना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल सीआईडी मामले की जांच में जुटी है। विशेष सॉफ्टवेयर की भूमिका, इसे तैयार करने वाले लोगों और कथित पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि इस साजिश को किस स्तर तक अंजाम दिया गया था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।