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महेंद्र सिंह धोनी को झारखंड स्टेट हाउसिंग बोर्ड का नोटिस, वीडियो में जाने H-10A प्लॉट पर कार्रवाई की आशंका

 

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को झारखंड स्टेट हाउसिंग बोर्ड (JSHB) ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस रांची के हरमू इलाके में स्थित H-10A आवासीय प्लॉट को लेकर है। बोर्ड का आरोप है कि यह प्लॉट केवल आवासीय उद्देश्य के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन वर्तमान में वहां कथित तौर पर एक पैथोलॉजी लैब संचालित की जा रही है।

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अधिकारियों ने बताया कि आवंटन के नियमों और शर्तों के अनुसार, आवासीय प्लॉट का उपयोग व्यावसायिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। नोटिस में धोनी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। झारखंड स्टेट हाउसिंग बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो प्लॉट का आवंटन रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, नोटिस में धोनी को 15 दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। उनके स्पष्टीकरण और प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। बोर्ड ने यह भी कहा है कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

हालांकि, धोनी या उनके प्रतिनिधियों की ओर से अभी तक इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। क्रिकेट जगत और मीडिया में इस खबर ने चर्चा का विषय बन गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला नियमों और आवंटन शर्तों के अनुपालन से जुड़ा है और इसके समाधान में समय लग सकता है।

पूर्व कप्तान धोनी ने हमेशा अपने निजी और व्यावसायिक मामलों में नियमों का पालन किया है। ऐसे में यह मामला उनके लिए अनूठा है और क्रिकेट प्रेमियों के बीच उत्सुकता का विषय बन गया है। नोटिस के बाद रांची और झारखंड स्टेट हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने सुरक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सख्त कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर धोनी समय पर संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर देते हैं, तो मामला आसानी से सुलझ सकता है। वहीं, अगर किसी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो बोर्ड के पास प्लॉट का आवंटन रद्द करने का अधिकार है।

इससे पहले भी कई सार्वजनिक और आवासीय आवंटनों के मामले में नियमों के उल्लंघन को लेकर विवाद सामने आए हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब एक क्रिकेटर के खिलाफ ऐसा मामला खुलकर सामने आया है। इस कारण से पूरे राज्य में मीडिया और आम जनता इस पर नजर बनाए हुए हैं।

झारखंड स्टेट हाउसिंग बोर्ड का कहना है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है और किसी भी आवासीय या व्यावसायिक संपत्ति के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। इस नोटिस के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि धोनी किस तरह से बोर्ड को संतोषजनक जवाब देते हैं और इस मामले का क्या निष्कर्ष निकलता है।