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झारखंड की मंत्री शिल्पी ने कर्नाटक के कृषि मॉडल की सराहना की, बोलीं- किसानों और पशुपालकों को मिलेगा फायदा

 

झारखंड की मंत्री शिल्पी ने कर्नाटक में कृषि, पशुपालन, डेयरी और सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण और सफल पहल की हैं। झारखंड सरकार ऐसे प्रभावी मॉडलों से सीख लेकर उन्हें राज्य में लागू करने पर विचार कर सकती है।

मंत्री शिल्पी ने कहा कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए दूसरे राज्यों के सफल प्रयोगों का अध्ययन करना जरूरी है। कर्नाटक ने किसानों की आय बढ़ाने, पशुपालन को प्रोत्साहित करने, डेयरी क्षेत्र को विकसित करने और सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इन मॉडलों को झारखंड की परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जाए तो इसका सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि झारखंड की बड़ी आबादी कृषि और उससे जुड़े कार्यों पर निर्भर है। ऐसे में किसानों के साथ पशुपालकों को भी बेहतर सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराना जरूरी है। कृषि के साथ पशुपालन और डेयरी को बढ़ावा देकर ग्रामीण परिवारों की आमदनी के अतिरिक्त स्रोत तैयार किए जा सकते हैं।

मंत्री के मुताबिक, सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करना भी किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मजबूत सहकारी संस्थाओं के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को एक साथ जोड़कर उन्हें उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार तक बेहतर पहुंच दिलाई जा सकती है।

उन्होंने कर्नाटक की पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि सफल योजनाओं को केवल दूसरे राज्यों में देखकर अपनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार उनमें बदलाव भी जरूरी है। झारखंड में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों और ग्रामीण आबादी की जरूरतों को ध्यान में रखकर इन मॉडलों को लागू किया जा सकता है।

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों और पशुपालकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। इसके लिए कृषि आधारित रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। डेयरी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में बेहतर तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों को काफी लाभ मिल सकता है।

कर्नाटक के अनुभवों से सीख लेकर झारखंड में कृषि, पशुपालन, डेयरी और सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने की संभावना जताई गई है। यदि सफल मॉडलों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो इससे राज्य के किसानों, पशुपालकों और सहकारी संस्थाओं को लंबे समय में फायदा मिल सकता है।