खनन राजस्व में झारखंड ने पड़ोसी राज्यों को छोड़ा पीछे, CM हेमंत सोरेन ने लॉन्च किया ‘आदिनिवासी ऐप’
झारखंड में खनन क्षेत्र को लेकर सामने आए नए आंकड़ों ने राज्य सरकार का उत्साह बढ़ा दिया है। आंकड़ों के आधार पर यह बात सामने आई है कि खनन राजस्व के मामले में झारखंड ने पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ‘आदिनिवासी ऐप’ भी लॉन्च किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है और सरकार खनिज संपदा का उपयोग राज्य के विकास और आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए करना चाहती है।
सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार राज्य को खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि बेहतर प्रबंधन, निगरानी और खनन गतिविधियों में पारदर्शिता के कारण राजस्व संग्रह में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि खनन से होने वाली आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं में किया जा रहा है।
इस दौरान लॉन्च किए गए ‘आदिनिवासी ऐप’ को आदिवासी समाज से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया गया। सरकार का दावा है कि यह ऐप आदिवासी समुदायों को सरकारी योजनाओं, जानकारी और सेवाओं से जोड़ने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि ऐप के जरिए आदिवासी समाज के लोगों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, प्रमाणपत्रों और जरूरी सूचनाओं तक आसान पहुंच मिलेगी। इसके साथ ही सांस्कृतिक और सामाजिक जानकारी भी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी।
राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। राज्य में कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिजों के विशाल भंडार मौजूद हैं, जो राजस्व का प्रमुख स्रोत माने जाते हैं।
फिलहाल राज्य सरकार खनन क्षेत्र में और अधिक निवेश, पारदर्शिता और तकनीकी सुधारों पर जोर दे रही है। वहीं ‘आदिनिवासी ऐप’ को लेकर भी सरकार को उम्मीद है कि यह आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण की दिशा में अहम कदम साबित होगा।