झारखंड में पत्नी चाहती थी पति घरजमाई बनकर रहे, पति ने मांगा तलाक; हाई कोर्ट ने याचिका की खारिज
झारखंड में वैवाहिक विवाद से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें पत्नी की इच्छा थी कि उसका पति घरजमाई बनकर उसके साथ रहे। पति ने पत्नी की इस मांग को लेकर अदालत का रुख किया और तलाक की अर्जी दाखिल कर दी। मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पति की तलाक की याचिका खारिज कर दी।
मामला पति-पत्नी के बीच रहने की व्यवस्था को लेकर शुरू हुए विवाद से जुड़ा था। पत्नी चाहती थी कि शादी के बाद उसका पति उसके मायके में रहकर घरजमाई के रूप में जीवन बिताए। पति ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई और बाद में इसे वैवाहिक विवाद का आधार बनाते हुए तलाक की मांग की।
मामला अदालत तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। पति की ओर से तलाक के लिए दिए गए आधार और पत्नी की मांग से जुड़े तथ्यों पर अदालत ने विचार किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि केवल पत्नी की ओर से पति के घरजमाई बनकर रहने की इच्छा जताना अपने आप में तलाक देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
हाई कोर्ट ने इसी आधार पर पति की तलाक की अर्जी खारिज कर दी। अदालत के फैसले के बाद मामले में पति को तलाक की कानूनी राहत नहीं मिल सकी। कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए याचिका पर फैसला सुनाया।
यह मामला सामने आने के बाद पति-पत्नी के बीच रहने की व्यवस्था और वैवाहिक अधिकारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, ऐसे मामलों में अदालत प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर फैसला करती है।