झारखंड में हर पंचायत में चुने जाएंगे 3 नल-जल मित्र, जल जीवन मिशन 2.0 से ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था होगी मजबूत
झारखंड सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राज्य की प्रत्येक पंचायत में तीन-तीन नल-जल मित्रों का चयन किया जाएगा। इनकी मदद से ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन, रखरखाव और मरम्मत से जुड़े कार्यों को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
इस संबंध में मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एपेक्स कमेटी की बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से पेश किए गए प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में नल के माध्यम से पेयजल की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ जलापूर्ति योजनाओं की देखरेख को मजबूत करना है।
हर पंचायत में तीन नल-जल मित्रों का होगा चयन
योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में तीन नल-जल मित्रों के चयन का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। इससे पंचायत स्तर पर जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित लोगों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार पाइपलाइन में खराबी, नल कनेक्शन में समस्या, मोटर खराब होने या अन्य तकनीकी कारणों से पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित नल-जल मित्रों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। वे निर्धारित जिम्मेदारियों के अनुसार छोटी-मोटी तकनीकी समस्याओं की पहचान और मरम्मत में सहायता कर सकेंगे।
जल जीवन मिशन 2.0 का क्या है उद्देश्य?
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त मात्रा में निर्धारित गुणवत्ता वाला पेयजल नियमित रूप से उपलब्ध कराना है। मिशन के दूसरे चरण में जलापूर्ति के बुनियादी ढांचे के साथ उसके संचालन और रखरखाव पर भी जोर दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार की योजना के तहत ग्राम पंचायतों और स्थानीय जल एवं स्वच्छता समितियों की भागीदारी से ग्रामीण जलापूर्ति व्यवस्था को टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नल-जल मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय लोगों को प्लंबिंग, बिजली संबंधी कार्यों और जलापूर्ति प्रणाली की मरम्मत जैसे कामों का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी है।
ग्रामीणों को मिल सकता है सीधा लाभ
झारखंड के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति योजनाओं का नियमित संचालन एक महत्वपूर्ण चुनौती है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता से खराबी आने पर उसे समय रहते ठीक करने में मदद मिल सकती है। इससे पानी की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहने की समस्या कम करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, नल-जल मित्रों के चयन और प्रशिक्षण से स्थानीय स्तर पर तकनीकी कौशल विकसित करने के अवसर भी मिल सकते हैं। हालांकि, चयन की प्रक्रिया, पात्रता, मानदेय और आवेदन की तारीखों से संबंधित विस्तृत जानकारी आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।
पेयजल योजनाओं के रखरखाव पर रहेगा जोर
जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केवल पाइपलाइन और नल कनेक्शन उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उनकी नियमित देखरेख भी महत्वपूर्ण है। झारखंड सरकार की यह पहल पंचायत स्तर पर जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी और रखरखाव को बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम है।
अब इस प्रस्ताव के क्रियान्वयन, नल-जल मित्रों के चयन और उनकी जिम्मेदारियों से जुड़े अगले निर्देशों पर नजर रहेगी। योजना प्रभावी तरीके से लागू होने पर ग्रामीण परिवारों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूती मिल सकती है।