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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: शादीशुदा बेटी को भी अनुकंपा नौकरी का अधिकार, 8 हफ्ते में नियुक्ति के आदेश

 

अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को नौकरी के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर बेटी परिवार की पात्र सदस्य है तो उसे भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का अधिकार है।

13 साल पुराने मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने संबंधित विभाग को आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को 8 हफ्ते के भीतर नियुक्ति पत्र जारी किया जाए। अदालत के इस फैसले को महिलाओं के अधिकारों और समानता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

शादी के आधार पर नहीं छीना जा सकता अधिकार

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि किसी बेटी का विवाह हो जाना उसके अधिकारों को खत्म नहीं करता। केवल इस आधार पर कि बेटी शादीशुदा है, उसे अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं किया जा सकता।अदालत ने माना कि परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद मिलने वाली अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता देना है। ऐसे में पात्रता तय करते समय केवल वैवाहिक स्थिति को आधार नहीं बनाया जा सकता।

13 साल से चल रहा था मामला

यह मामला पिछले 13 वर्षों से अदालत में लंबित था। याचिकाकर्ता ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, लेकिन शादीशुदा होने के कारण उसके दावे को स्वीकार नहीं किया गया।इसके बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया और अपने अधिकार की मांग की। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हाई कोर्ट ने अब उसके पक्ष में फैसला सुनाया है।

विभाग को नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश

हाई कोर्ट ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया है कि वह अदालत के आदेश का पालन करते हुए तय समय सीमा में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करे। अदालत ने 8 सप्ताह के अंदर नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया है।फैसले के बाद याचिकाकर्ता को बड़ी राहत मिली है। वहीं, इस आदेश से ऐसे अन्य मामलों में भी प्रभाव पड़ने की संभावना है, जहां शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित किया गया है।

महिलाओं के अधिकारों पर अहम टिप्पणी

हाई कोर्ट का यह फैसला महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में यह संदेश दिया कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और अधिकारों को केवल विवाह की स्थिति के आधार पर अलग नहीं किया जा सकता।विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन मामलों में मार्गदर्शक साबित हो सकता है, जहां सरकारी नौकरी में अनुकंपा नियुक्ति के लिए बेटियों की पात्रता पर सवाल उठाए जाते हैं।अदालत के इस फैसले के बाद अब शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में समान अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।