Hemant Soren: हाईकोर्ट में सुनवाई टालने की मांग पर भड़का कोर्ट, सोरेन पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े एक मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। सोरेन की ओर से पेश वकील ने अदालत से सुनवाई टालने और जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की। इस पर अदालत ने गौर किया कि मामले में पहले भी कई बार सुनवाई टालने की मांग की जा चुकी है। इसके बाद कोर्ट ने अतिरिक्त समय देने का अनुरोध तो स्वीकार कर लिया, लेकिन प्रतिवादी पक्ष पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया।
बार-बार समय मांगने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान सोरेन के वकील की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया। अदालत ने इस पर ध्यान दिया कि इससे पहले भी सुनवाई टालने के लिए कई बार अनुरोध किया जा चुका है।
कोर्ट ने कहा कि जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जा रहा है, लेकिन इसके साथ लागत भी लगाई जा रही है। अदालत ने निर्देश दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल किया जाए।
ईडी अधिकारियों से जुड़ा है मामला
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एससी-एसटी एक्ट से संबंधित याचिका से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईडी के अधिकारियों ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। इसी मामले में हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल किया जाना है।
अदालत के सामने सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया और इसमें हो रही देरी का मुद्दा उठा। कोर्ट ने अतिरिक्त समय देने के साथ यह भी स्पष्ट किया कि अब तय समय सीमा का पालन करना होगा।
10 हजार रुपये की लागत लगाई गई
अदालत ने सोरेन की ओर से समय मांगने के अनुरोध को पूरी तरह खारिज नहीं किया। जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया, लेकिन देरी को देखते हुए 10 हजार रुपये की लागत लगाने का आदेश दिया गया।
इस आदेश के बाद मामले की अगली कार्रवाई निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ेगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जवाब समय पर दाखिल किया जाना चाहिए।
हाईकोर्ट में जारी है कानूनी प्रक्रिया
हेमंत सोरेन से जुड़े अलग-अलग मामलों में झारखंड हाईकोर्ट और निचली अदालतों में कानूनी कार्यवाही चल रही है। बड़गाईं जमीन मामले में भी हाल ही में रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप तय किए हैं। हालांकि, वह कार्यवाही इस 10 हजार रुपये की लागत वाले मामले से अलग है।
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक जवाब दाखिल होने के बाद आगे की सुनवाई होगी।