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जेपीएससी गड़बड़ी को लेकर अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो ने तोड़ा उपवास, सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद पिया पानी

 

झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की कथित गड़बड़ियों को लेकर आंदोलन कर रहे देवेंद्र महतो ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है। पिछले चार दिनों से बिना अन्न और जल के अनशन पर बैठे देवेंद्र महतो ने बुधवार को पानी ग्रहण किया। बताया जा रहा है कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत के बाद उन्होंने जल ग्रहण करने का फैसला लिया।

देवेंद्र महतो जेपीएससी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और छात्रों की मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। उनके अनशन को लेकर छात्र संगठनों और युवाओं में भी चर्चा तेज हो गई थी। चार दिनों तक बिना भोजन और पानी के रहने के कारण उनकी तबीयत को लेकर समर्थकों में चिंता बढ़ गई थी।

सोनम वांगचुक से बातचीत के बाद लिया फैसला

जानकारी के मुताबिक, देवेंद्र महतो की सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर बातचीत हुई। बातचीत के दौरान वांगचुक ने उनके आंदोलन और मांगों की जानकारी ली। इसके बाद देवेंद्र महतो ने जल ग्रहण कर अपना अनशन खत्म करने का निर्णय लिया।

अनशन समाप्त करने के बाद देवेंद्र महतो ने कहा कि उनका आंदोलन छात्रों के अधिकारों और पारदर्शी व्यवस्था की मांग को लेकर था। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और संबंधित संस्थाएं छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेंगी।

जेपीएससी मुद्दे को लेकर जारी है विरोध

जेपीएससी में कथित गड़बड़ी को लेकर झारखंड में लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि आयोग की कार्यप्रणाली में कई खामियां रही हैं, जिससे अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

वहीं, प्रशासन की ओर से पूरे मामले पर नजर रखी जा रही है। आंदोलनकारियों की मांगों और शिकायतों को लेकर संबंधित अधिकारियों से बातचीत भी की जा रही है।

समर्थकों ने जताई राहत

देवेंद्र महतो के अनशन तोड़ने के बाद उनके समर्थकों और छात्रों ने राहत की सांस ली। चार दिनों तक बिना जल के रहने के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई थी। समर्थकों ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाना था और आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।

फिलहाल, जेपीएससी विवाद को लेकर आगे की रणनीति पर आंदोलनकारियों की नजर बनी हुई है। वहीं, सभी की निगाहें अब सरकार और आयोग की ओर हैं कि छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।