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झारखंड में नामांकन रद्द करने की मांग से बढ़ी सियासी हलचल, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उठाया मुद्दा

 

मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज होने के बाद अब झारखंड की राजनीति में भी नामांकन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राज्य में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को रद्द करने की मांग उठाई है।

कांग्रेस की झारखंड इकाई के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को इस मामले को लेकर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए और संबंधित उम्मीदवार के नामांकन की जांच की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया में कुछ तकनीकी या दस्तावेजी खामियां हो सकती हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इसी के तहत उन्होंने चुनाव आयोग से इस नामांकन की समीक्षा करने की अपील की है।

हालांकि, अब तक इस मामले में न तो निर्वाचन आयोग और न ही जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। नामांकन रद्द किए जाने की मांग फिलहाल राजनीतिक स्तर पर ही उठाई गई है और इस पर अंतिम निर्णय चुनावी नियमों और जांच प्रक्रिया के बाद ही संभव होगा।

वहीं दूसरी ओर, भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की ओर से भी इस पूरे मामले पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। उनके समर्थकों का कहना है कि नामांकन पूरी तरह नियमों के अनुसार दाखिल किया गया है और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप सामान्य हैं, लेकिन इसका असर राजनीतिक समीकरणों और मतदाताओं की धारणा पर भी पड़ सकता है। झारखंड में पहले से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और चुनावी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोर देकर कहा कि यदि किसी उम्मीदवार के नामांकन में किसी प्रकार की गलती या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न हो सके।

निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया बेहद सख्त होती है और इसके लिए ठोस सबूत और कानूनी आधार जरूरी होता है। केवल आरोपों के आधार पर किसी भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द नहीं किया जा सकता।

फिलहाल यह मामला झारखंड की सियासत में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।