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योजनाओं में गड़बड़ी पर सीएम हेमंत सोरेन का बयान: ‘गलत लाभ लेने वालों के लिए 90% लोगों को प्रभावित नहीं किया जा सकता

 

झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी जनकल्याणकारी योजना में यह संभव है कि लगभग 5 से 10 प्रतिशत लोग गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश करें, लेकिन ऐसे मामलों को रोकने के नाम पर 90 प्रतिशत सही लाभार्थियों को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विभिन्न सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और लाभार्थियों तक सही ढंग से लाभ पहुंचाने को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य अधिकतम जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, न कि गलत उपयोग के डर से पूरी व्यवस्था को बाधित करना।

हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रशासनिक तंत्र को इतना मजबूत और सक्षम बनाया जाना चाहिए कि वह गलत लाभ लेने वाले लोगों की पहचान कर सके और उन पर कार्रवाई कर सके, लेकिन इसके लिए पूरी योजना की गति को रोक देना समाधान नहीं हो सकता। उनके अनुसार, संतुलित दृष्टिकोण अपनाना ही सबसे व्यावहारिक तरीका है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार लगातार तकनीक और डिजिटल सिस्टम के माध्यम से योजनाओं की निगरानी को मजबूत कर रही है, ताकि लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचे और किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश कम हो।

सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आधार आधारित पहचान, DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) और डिजिटल वेरिफिकेशन जैसे उपायों को तेजी से लागू किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से गलत लाभ लेने वालों पर नियंत्रण किया जा सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान योजनाओं के क्रियान्वयन और सामाजिक कल्याण नीति के बीच संतुलन को दर्शाता है, जहां सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि व्यापक जनता तक लाभ बिना रुकावट पहुंचे।

वहीं, विपक्ष का मानना है कि योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लेना चाहिए और इसके लिए सख्त निगरानी व्यवस्था जरूरी है, ताकि सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

फिलहाल, मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य में कल्याणकारी योजनाओं की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।