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JPSC-CGL मामले में CID जांच पर बड़ा अपडेट, हाईकोर्ट की कमेटी करेगी परीक्षा जांच की निगरानी
 

 

झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी-सीजीएल की रद्द की गई नियुक्ति प्रक्रिया और परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी की जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को मॉनिटर नियुक्त किया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब जांच की प्रगति पर न्यायिक निगरानी बनी रहेगी।

जेपीएससी-सीजीएल परीक्षा और इससे जुड़ी नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सामने आए विवाद के बाद मामले ने कानूनी रूप ले लिया था। परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और उससे जुड़े विभिन्न आरोपों को लेकर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की गई थीं। सुनवाई के दौरान जांच की स्थिति और अब तक हुई कार्रवाई को लेकर भी अदालत के समक्ष पक्ष रखा गया।

मामले की जांच झारखंड सीआईडी की एसआईटी कर रही है। हाईकोर्ट ने जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश को मॉनिटर नियुक्त करने का निर्णय लिया है। जस्टिस गौतम कुमार चौधरी जांच की प्रगति पर नजर रखेंगे और यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगे कि जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़े।

कोर्ट के इस आदेश को जेपीएससी-सीजीएल मामले में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े विवाद में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की रुचि है। ऐसे में जांच की प्रक्रिया पर न्यायिक निगरानी होने से मामले की कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर रहेगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच से जुड़े पहलुओं पर विचार किया। एसआईटी की ओर से की जा रही कार्रवाई और मामले में अब तक जुटाई गई जानकारी भी जांच का हिस्सा है। अब सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी की जांच आगे बढ़ेगी।

जेपीएससी-सीजीएल परीक्षा को लेकर विवाद के कारण अभ्यर्थियों के बीच भी लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई है। परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। अदालत के आगे के आदेशों से यह स्पष्ट होगा कि मामले में जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर क्या दिशा तय होती है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जांच एजेंसी को अपनी कार्रवाई और प्रगति की जानकारी निगरानी व्यवस्था के तहत आगे बढ़ानी होगी। मामले से जुड़े अभ्यर्थियों और अन्य पक्षों की नजर अब जांच की अगली कार्रवाई पर रहेगी। एसआईटी की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।