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पाकिस्तान हमले में पुंछ के दो गुरुद्वारों को नुकसान, लोगों की अपील- सरकार करे मदद

 

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना ने जम्मू-कश्मीर के रिहायशी और धार्मिक स्थलों पर हमला कर अपनी कायरता की हदें पार कर दी हैं। खासकर पुंछ जिले के दो गुरुद्वारे पाकिस्तान की गोलाबारी का निशाना बने। पांच दिनों से जारी हमलों में भले ही कोई जान-माल की हानि नहीं हुई हो, लेकिन धार्मिक स्थलों को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

पाकिस्तानी सेना द्वारा जानबूझकर गुरुद्वारों पर तोप के गोले दागे गए, जिससे इन ऐतिहासिक और पवित्र स्थलों की दीवारें क्षतिग्रस्त हो गईं। गुरुद्वारे में सेवा देने वाले स्थानीय लोगों ने मलबे और विस्फोट के निशान दिखाते हुए पाकिस्तानी हमले के स्पष्ट सबूत भी प्रस्तुत किए हैं।

गुरुद्वारे में सेवा दे रहे गुरमीत सिंह ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, "धमाके के वक्त करीब 30 से 40 लोग गुरुद्वारे में शरण लिए हुए थे। पाकिस्तान की कायरता के कारण गुरुद्वारे को भारी नुकसान हुआ है। मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे को निशाना बनाना निंदनीय है।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार से उनकी उम्मीद है कि क्षतिग्रस्त इमारतों की मरम्मत जल्द करवाई जाएगी।

एक अन्य स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि हमले के वक्त सुबह के छह बजे थे और गुरुद्वारे में लगभग 40 लोग मौजूद थे। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान शायद सोचता है कि हम डरकर भाग जाएंगे, लेकिन हम अपनी धरती नहीं छोड़ेंगे। हम यहीं खड़े रहेंगे, अपनी सेना के साथ।"

सुरेंद्र सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पिछले कुछ दिनों में जानबूझकर मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारों को निशाना बनाया है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी सेना जानती है कि आम लोग संकट के समय इन धार्मिक स्थलों में शरण लेते हैं, इसलिए इन्हें ही निशाना बनाया गया। यह न केवल सैन्य नैतिकता के विरुद्ध है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं पर भी गहरा प्रहार है।"

यह पूरी घटना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों और युद्ध के दौरान धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। पाकिस्तान की इस हरकत से क्षेत्र में तनाव और अधिक बढ़ गया है।

भारत सरकार और सेना पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि आतंकवाद और उससे जुड़ी हर गतिविधि का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। लेकिन अब जब धार्मिक स्थलों को भी निशाना बनाया जा रहा है, तो यह एक नए खतरे की चेतावनी है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार न सिर्फ इन स्थलों की मरम्मत करवाए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की इस करतूत को उजागर करे, ताकि उसे वैश्विक स्तर पर जवाबदेह ठहराया जा सके।