चुशुल में भारत का पहला हाई-एल्पाइन ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट, जाने यह कदम कैसे देश के लिए साबित होगा मील का पत्थर
भारतीय सेना ने पर्यावरण और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में एक नया बेंचमार्क बनाया है। लद्दाख के चुशुल में दुनिया का सबसे ऊंचा ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट लॉन्च किया गया है। यह प्रोजेक्ट भारत के पहले गांवों (सीमावर्ती क्षेत्रों) को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने की दिशा में सेना का एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रोजेक्ट को NTPC (नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन) के सहयोग से विकसित किया गया है।
चुशुल ग्रीन हाइड्रोजन माइक्रोग्रिड प्रोजेक्ट क्या है?
चुशुल लद्दाख में समुद्र तल से 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है – जो इसे दुनिया का सबसे ऊंचा ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट बनाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन: सोलर पैनल से बिजली बनाई जाएगी, और पानी से हाइड्रोजन गैस निकाली जाएगी।
माइक्रोग्रिड: यह एक छोटा पावर ग्रिड है जो सैनिकों को 24 घंटे स्वच्छ बिजली देगा।
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम: पहले डीजल जनरेटर का इस्तेमाल होता था; अब हाइड्रोजन से बिजली बनेगी।
कार्बन उत्सर्जन में कमी: सालाना 1500 टन CO₂ उत्सर्जन कम होगा।
कठिन परिस्थितियों में संचालन: यह सिस्टम -40 डिग्री सेल्सियस तापमान, तेज हवाओं और कम ऑक्सीजन स्तर में भी काम करेगा।
यह प्रोजेक्ट स्थिरता, लचीलेपन और आत्मनिर्भरता के प्रति सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह प्रोजेक्ट क्यों बनाया गया?
लद्दाख में सीमा पर तैनात सैनिकों को लगातार बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। पहले, डीजल से चलने वाले जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता था, जो: महंगे ईंधन पर निर्भर थे, प्रदूषण फैलाते थे, और लॉजिस्टिक्स चुनौतियां पैदा करते थे (ट्रकों से ईंधन पहुंचाना)।
अब, ग्रीन हाइड्रोजन के साथ:
बिजली स्वच्छ होगी। ईंधन की आवश्यकता कम होगी। पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित होगा। सेना का खर्च भी कम होगा।
प्रोजेक्ट का महत्व
सैनिकों के लिए: 24 घंटे बिजली मिलने से उनका जीवन आसान हो जाएगा।
राष्ट्रीय स्तर पर: यह ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देता है, जो भारत का एक प्रमुख लक्ष्य है (2030 तक 5 मिलियन टन हाइड्रोजन उत्पादन)।
सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए: यह भारत के पहले गांवों (सीमावर्ती गांवों) को स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा। वैश्विक संदेश: दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर एक ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट – यह भारत की तकनीकी क्षमता को दिखाता है।