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गोडावण संरक्षण में ऐतिहासिक उपलब्धि, गुजरात में एक दशक बाद चूजे का जन्म, राजस्थान–गुजरात प्रयासों को बड़ी सफलता

 

अति संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण (Great Indian Bustard) के संरक्षण प्रयासों में एक ऐतिहासिक सफलता दर्ज की गई है। वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India) के संयुक्त प्रयासों से गुजरात में करीब एक दशक बाद गोडावण के चूजे का सफल जन्म हुआ है, जिसे संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, जिसे राजस्थान का राज्य पक्षी भी कहा जाता है, पिछले कई वर्षों से गंभीर विलुप्ति संकट का सामना कर रहा है। इसके प्राकृतिक आवास में लगातार कमी, बिजली लाइनों से खतरा और प्रजनन दर में गिरावट के कारण इसकी संख्या तेजी से घटती जा रही है।

इसी को देखते हुए राजस्थान और गुजरात में चल रहे विशेष संरक्षण कार्यक्रमों के तहत वैज्ञानिक तकनीकों और संरक्षित ब्रीडिंग प्रयासों को तेज किया गया है। इसी अभियान के परिणामस्वरूप गुजरात में एक दशक के लंबे अंतराल के बाद गोडावण के चूजे का जन्म संभव हो सका है।

इस उपलब्धि की जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने साझा की। उन्होंने इसे देश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए “मील का पत्थर” बताते हुए कहा कि यह सफलता वैज्ञानिक संरक्षण रणनीतियों और राज्यों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह जन्म न केवल एक वैज्ञानिक सफलता है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि यदि संरक्षण प्रयास लगातार और व्यवस्थित तरीके से किए जाएं, तो संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि गोडावण की आबादी को स्थिर करने के लिए अब कृत्रिम प्रजनन, सुरक्षित आवास निर्माण और बिजली लाइनों के प्रभाव को कम करने जैसे कदम और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने होंगे।

राजस्थान और गुजरात के संरक्षण मॉडल को अब देश के अन्य हिस्सों में भी अपनाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण को गति दी जा सके।

कुल मिलाकर, गोडावण के चूजे का यह जन्म न केवल एक जैव विविधता से जुड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह भारत में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई उम्मीद और दिशा भी प्रदान करता है।