उत्तराखंड में मदरसा छात्रों पर अनिश्चितता का साया
ईद मोहम्मद आश्यान के लिए कैलेंडर का सबसे पसंदीदा समय है। हालांकि, इस साल यह त्यौहार वैसा नहीं रहा, क्योंकि पंद्रह वर्षीय आश्यान दुखी और चिंतित है, क्योंकि अनिश्चितता उसके एकमात्र सपने पर हावी हो रही है। उसकी बस यही इच्छा है कि वह अपने परिवार में कई पीढ़ियों में पहला व्यक्ति बने, जो इस्लाम की पवित्र पुस्तक कुरान पढ़ सके।
रुड़की के मदरसा इरशाद-उल-उलूम का छात्र आश्यान उन 136 मदरसों (इस्लामिक अध्ययन के लिए स्कूल) के सैकड़ों छात्रों में से एक है, जिन्हें मार्च के महीने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्यव्यापी कार्रवाई में सील कर दिया गया था। सरकार का कहना है कि ये मदरसे ‘अवैध’ रूप से चल रहे थे और बच्चों को ‘उचित’ शिक्षा देने के लिए अयोग्य थे। सूत्रों का कहना है कि राज्य में लगभग 500 ऐसे संस्थान चल रहे हैं जो मानदंडों का उल्लंघन करते हैं और आने वाले दिनों में बंद हो जाएंगे।