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हिमाचल में मंडरा रहा ‘ग्लेशियर झील’ का खतरा, सिस्सू समेत 34 इलाकों पर तबाही का डर, फुटेज में देंखे 33 साल में तीन गुना बढ़ी घेपन झील

 

हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत पहाड़ी इलाकों पर अब जलवायु परिवर्तन का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। लाहौल-स्पीति जिले का मशहूर पर्यटन स्थल सिस्सू गांव समेत 34 से ज्यादा इलाके घेपन झील से संभावित तबाही के खतरे में बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह ग्लेशियर झील फटती है, तो निचले क्षेत्रों में भारी विनाश हो सकता है।स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को सौंपी गई एक रिपोर्ट में इस खतरे को लेकर गंभीर खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक क्लाइमेट चेंज के कारण लगातार बढ़ रहे तापमान की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसी के चलते घेपन झील का आकार हर साल बढ़ता जा रहा है और अब यह एक बड़े खतरे का रूप ले चुकी है।

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रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 1989 में घेपन झील का क्षेत्रफल केवल 36.49 हेक्टेयर था। लेकिन साल 2022 तक यह बढ़कर 101.30 हेक्टेयर तक पहुंच गया। यानी करीब 33 वर्षों में झील का आकार लगभग तीन गुना बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार इसी तरह जारी रही तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ा खतरा ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) का है। यह ऐसी स्थिति होती है जब ग्लेशियर झील का प्राकृतिक बांध टूट जाता है और अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहने लगता है। अगर घेपन झील फटती है तो डाउनस्ट्रीम में मौजूद खेत, खलिहान, पुल, सड़कें और कई गांव पानी में समा सकते हैं।

Sissu समेत लाहौल-स्पीति के कई इलाके पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हर साल हजारों पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखने पहुंचते हैं। लेकिन अब बढ़ता पर्यावरणीय खतरा स्थानीय लोगों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का असर है। पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश में तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका असर बर्फ और ग्लेशियरों पर साफ दिखाई दे रहा है। इससे न केवल झीलों का आकार बढ़ रहा है बल्कि भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।

रिपोर्ट के बाद प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। वैज्ञानिक लगातार झील की निगरानी कर रहे हैं और संभावित खतरे को कम करने के उपायों पर काम किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच शांत और खूबसूरत दिखने वाली घेपन झील अब संभावित तबाही का संकेत बनती जा रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह क्षेत्र बड़े प्राकृतिक संकट का सामना कर सकता है।