भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेल लाइन को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, भूमि अधिग्रहण की तीन समय-विस्तार अधिसूचनाएं रद्द
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के संबंध में राज्य सरकार की ओर से जारी की गई तीन समय-विस्तार अधिसूचनाओं को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। अदालत के इस फैसले से परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े मामलों पर असर पड़ सकता है।
समय-विस्तार को लेकर उठे थे सवाल
भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेलवे लाइन को हिमाचल प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में माना जाता है। इस परियोजना के लिए कई क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी प्रक्रिया के दौरान भूमि अधिग्रहण से संबंधित निर्धारित समय सीमा को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से तीन अलग-अलग समय-विस्तार अधिसूचनाएं जारी की गई थीं।
इन अधिसूचनाओं को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से जारी तीनों समय-विस्तार अधिसूचनाओं को वैध नहीं माना और उन्हें रद्द करने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट के फैसले से क्या असर पड़ेगा
अदालत के इस निर्णय का सीधा संबंध भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रशासनिक कदमों से है। समय-विस्तार अधिसूचनाओं के रद्द होने के बाद संबंधित भूमि अधिग्रहण मामलों की स्थिति पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
परियोजना से प्रभावित भूमि मालिकों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में समय सीमा और उससे जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन किस तरह किया गया, यह मामले का प्रमुख बिंदु रहा।
रेल परियोजना के लिए महत्वपूर्ण है भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी लाइन
भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी ब्रॉडगेज रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। बिलासपुर क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिहाज से इस परियोजना को अहम माना जाता है। परियोजना के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया लंबे समय से अलग-अलग चरणों में चल रही है।
अब हाईकोर्ट द्वारा तीनों समय-विस्तार अधिसूचनाओं को रद्द किए जाने के बाद संबंधित विभागों को अदालत के आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी। भूमि अधिग्रहण से जुड़े अन्य मामलों में भी इस फैसले का प्रभाव देखने को मिल सकता है।