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सुखबीर सिंह बादल आठ साल पुराने मानहानि मामले में जमानत पर रिहा

 

शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल शनिवार को आठ साल पुराने मानहानि मामले में चंडीगढ़ की जिला अदालत में पेश हुए। इस दौरान उन्होंने कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत दे दी।

यह मामला आठ साल पहले दर्ज किया गया था और इस दौरान विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के चलते मामला लंबित था। कोर्ट के समक्ष पेशी के दौरान सुखबीर सिंह बादल ने अपनी ओर से पूरा सहयोग और कोर्ट के आदेशों का पालन करने का आश्वासन दिया। अदालत ने उनकी जमानत मंजूर करते हुए उन्हें सशर्त रिहा किया।

सुखबीर सिंह बादल के वकील ने मीडिया को बताया कि यह मामला राजनीतिक रूप से सटीक संदर्भ में उत्पन्न हुआ था और अब न्यायालयिक प्रक्रिया पूरी होने तक सुखबीर सिंह बादल को जमानत मिल गई है। उन्होंने कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कार्रवाई कानून और नियमों के अनुसार होगी।

सुखबीर सिंह बादल की जमानत से SAD समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में राहत की लहर दौड़ गई है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेता की अदालत में सुरक्षित रिहाई पार्टी के राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित नहीं करेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला पंजाब की राजनीति में लंबे समय से चल रहे विवादों का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि राजनीतिक नेताओं पर लंबे समय से दर्ज मामले जनमत और पार्टी की छवि पर असर डाल सकते हैं, लेकिन जमानत मिलने के बाद नेता राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय हो सकते हैं।

सुखबीर सिंह बादल ने कोर्ट के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि वह हमेशा कानून का सम्मान करते हैं और इस मामले में भी उन्हें पूरी उम्मीद है कि न्याय उचित तरीके से पूरा होगा। उन्होंने अपने समर्थकों से आग्रह किया कि वे शांति बनाए रखें और संसदीय और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करें।

पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में राजनीतिक नेताओं के खिलाफ मानहानि और अन्य मामलों की संख्या बढ़ी है, और ऐसे मामलों में अदालत द्वारा जमानत देना आम प्रक्रिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत मिलने के बाद नेता अपनी राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क में तेजी ला सकते हैं, जिससे चुनावी रणनीति और पार्टी संगठन को मजबूती मिलती है।

इस घटना ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल पैदा कर दी है। SAD समर्थक और विपक्षी दल दोनों ही इस जमानत को लेकर सक्रिय टिप्पणियां कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि सुखबीर सिंह बादल की रिहाई से पार्टी की रणनीति और भविष्य की चुनावी तैयारियों में नई ऊर्जा आ सकती है।